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'सरबजीत' फिल्म देख प्रेरित हुए आबिद हुसैन, विदेशों में फंसे सैकड़ों लोगों की करा चुके वतन वापसी
By आईएएनएस | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 11/3/2020 4:45:11 PM
'सरबजीत' फिल्म देख प्रेरित हुए आबिद हुसैन, विदेशों में फंसे सैकड़ों लोगों की करा चुके वतन वापसी

नई दिल्ली: रियल लाइफ के बजरंगी भाईजान कहे जाने वाले सयैद आबिद हुसैन के प्रयासों की वजह से 100 से अधिक लोगों की वतन वापसी हो चुकी है। इनमें दूसरे देश के नागरिक भी शामिल हैं। यही नहीं करीब 10 शवों को उनके परिजनों को सौंप चुके हैं। दरअसल सयैद आबिद हुसैन सरबजीत फिल्म देख कर काफी प्रेरित हुए। उनका मानना है की सरबजीत की बहन के पास कोई जानकार व्यक्ति होता तो उनकी काफी अच्छी मदद होती। फिल्म से प्रेरित हो आबिद ने विदेशों में फसे लोगों की मदद करना शुरू की। हालांकि फिल्म देखने से पहले भी वो 1-2 शख्स की वतन वापसी करा चुके थे।

सयैद आबिद हुसैन उत्तरप्रदेश के अंबेडकर नगर के रुद्रपुर बगाही गांव के रहने वाले हैं और वर्तमान में मध्यप्रदेश के भोपाल में अपनी पत्नी और अपने 11 साल के बेटे के साथ रहते हैं। दरअसल आबिद अपना जीवन व्यतीत करने के लिए इंटीरियर डिजाइनिंग का काम करते हैं।

साउथ अफ्रीका, यूएसए, कुवैत नेपाल, बेहरीन, पाकिस्तान, सऊदी, कतर, दुबई, ओमान और मलेशिया जैसे देशों में फंसे सैकड़ों भारतीय और दूसरे मुल्क के लोगों को एक मुहिम चला कर देश की मिट्टी और अपनों से मिलवा चुके हैं।

सयैद आबिद 2016 से ये काम करते आ रहे हैं। खास बात ये है कि इसके लिए वो किसी तरह की कोई रकम नहीं लेते। दरअसल आबिद से लोग ट्विटर के जरिये संपर्क करते हैं। इसके अलावा आये दिन लोग उनसे फोन पर संपर्क करके मदद मांगते हैं। जिसके बाद वो उस देश से जुड़ी एंबेसी में संपर्क कर पीड़ित परिवार की मदद करते हैं।

आबिद ने अपने प्रयासों से एक पर्वतारोही गौतम राजभर यूपी के अंबेडकर नगर निवासी की भी वतन वापसी कराई। दरअसल गौतम पैसे कमाने के लिए सऊदी अरब चले गए थे। जहां वो फंस गए, कई दिनों तक गौतम का फोन नहीं आया और एक दिन गौतम ने रो-रो कर एक वीडियो डाला। जिसमें वो वतन वापस आने के लिए मदद मांग रहे थे। जिसके बाद आबिद से उसके परिजनों ने संपर्क किया और वो अपने घर वापस आ गए। न जाने ऐसे कितने लोगों की आबिद मदद कर चुके हैं।

सयैद आबिद हुसैन ने आईएएनएस को बताया, "2006 में भोपाल आया और 2015 तक किसी तरह के कोई समाजिक काम नहीं किये थे। पाकिस्तान निवासी एक 9 साल का बच्चा बांग्लादेश के रास्ते भोपाल आ गया था। मुझे इस मामले की जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद मैंने जद्दोजहद कर बच्चे को उसके मुल्क भिजवाया।"

दरअसल आबिद से लोग ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये जुड़ते हैं और मदद मांगते हैं। फिर उस मामले को लेकर सरकार और संबंधित एंबेसी से संपर्क करते हैं।

सयैद आबिद हुसैन ने इस मामले के बाद गल्फ देशों में फंसे लोगों की मदद करना शुरू की। जिसके बाद उन्हें कई ऐसे मामले मिले जिसमें फर्जी एजेंट के माध्यम से लोग दूसरे देशों में फंस जाते थे।

सयैद आबिद हुसैन ने बताया, "कुछ एजेंट बहुत बड़ी मजदूरों की टोली लेकर जाते हैं और फिर वहां उन लोगों से उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं। फिर वो लोग दर दर भटकने को मजबूर हो जाते हैं। कई मामलों में यहां से गये हुये लोग बहुत बुरी तरह से परेशान हो जाते हैं, उनके साथ मार पीट जैसी घटना भी होती है। ऐसे पीड़ितों की जानकरी आने लगी। हमने इन मामलों पर गौर करना शुरू किया। 2018 से 2020 तक हमने सैंकड़ों लोगों की मदद भी की।"

"सरबजीत फिल्म देखने के बाद मैंने विदेशों में फंसे लोगों की मदद करना शुरू की और एक अच्छा रिस्पॉन्स भी मिलने लगा। ट्विटर, मेल, फोन के जरिये लोग हमसे जुड़ने लगे। हम कुछ लोगों को राह भी दिख देते हैं कि आप इस एंबेसी से संपर्क करिए।"

हालांकि इतनी लोगों की मदद करने के बाद सयैद आबिद को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 25 से अधिक अवॉर्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है। एक्सीलेंस अवार्ड, राष्ट्रीय प्रेरणा अवॉर्ड, विवेकानंद लीडरशिप, आदि अवॉर्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं। वहीं आबिद को मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की तरफ से भी सम्मानित किया गया है।

सयैद आबिद ने आईएएनएस को बताया, "मैं शुरू से ही अकेले काम करता आ रहा हूं, हालांकि शुरूआती वक्त में मेरे साथ कुछ लोग जुड़े, लेकिन बाद में छोड़ गए।"

उन्होंने बताया, "हम मदद करते वक्त किसी का समुदाय या धर्म नहीं देखते। हमारे पास कॉल आती हैं जो कि बेहद दर्दनाक होती हैं। वो एक हिंदुस्तानी और एक इंसान होता है। हम उसकी जानकारी इकट्ठा करके सम्बंधित एंबेसी को भेज देते हैं। जिसके बाद उसकी मदद हो जाती है।"

"देश की सुरक्षा मेरे लिए महत्वपूर्ण है, अगर कोई सरकार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या पूछताछ करने के लिए ले जाती है तो उसमें बेगुनाह हो तो आप छूट भी जाते हो। जबरदस्ती सजा किसी को नहीं मिलती।"

"इस देश में मुझे कभी एहसास नहीं हुआ कि मेरे खिलाफ दूसरे समुदाय द्वारा आलोचना की जा रही हो। मैं शोशल मीडिया से भी जुड़ा हूं। हमें सभी धर्म के लोग प्रेम करते हैं। मेरे अधिकतर दोस्त दूसरे समुदाय से हैं और मेरी पोस्ट पर बहुत प्रेम से जवाब देते हैं। अच्छा काम करोगे तो लोग तारीफ करेंगे।"

"पूरी दुनिया में अमन शांति होनी चाहिए, जिस देश में रह रहे हैं, तो वहां के कानून का समर्थन करना चाहिए। निर्देशों को मानना चाहिए, सरकार जो भी फैसले करती है वो सभी के लिए करती है, किसी समुदाय विशेष के लिए कोई नियम नहीं होते।"

"मेरे बिना भी लोग अपनी मदद कर सकते हैं। लोग रोजाना पैरवी नहीं कर पाते तो मैं उनकी पैरवी करता हूं। नेक काम करने से दुआ मिलती है, जिसकी वजह से हमारा व्यापार भी अच्छा चलता है, हमें आर्थिक मदद की जरूरत नहीं और न ही हम किसी से इस मदद का पैसा मांगते हैं।"

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