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'आत्मनिर्भर भारत' के माध्यम से देश के भविष्य की आधारशिला रखी
By प्रकाश जावड़ेकर | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 5/30/2020 2:07:06 PM
'आत्मनिर्भर भारत' के माध्यम से देश के भविष्य की आधारशिला रखी

मोदी जी पिछले छह वर्षों से इस देश का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। यह उनके दूसरे कार्यकाल का पहला वर्ष है जो पूरा हुआ है। यह वर्ष घटना प्रधान रहा। मोदी जी के काम को तीन-आयामी गतिविधियों के रूप में देखा जा सकता है। पहली, कुछ ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहलें। दूसरी, कोविड19 से संघर्ष, और तीसरी आत्मनिर्भर भारत के जरिये भारत के भविष्य की आधारशिला रखना।

धारा 370 का उन्मूलन, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में निर्माण, नागरिकता संशोधन विधेयक का पारण, ट्रिपल तलाक का उन्मूलन तथा राम मंदिर निर्माण की राह प्रशस्त करने को राष्ट्रीय और ऐतिहासिक राजनीतिक पहलों के रूप में बताया जा सकता है। इसके बाद कश्मीर की स्थिति में सुधार हुआ है। अब तो वहां इंटरनेट भी बहाल कर दिया गया है। हमारी सेना पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर नजर रखे हुए है। आधी सदी से अधिक पुराने बोडो संकट को समाप्त करने के लिए एक व्यापक समझौता किया गया जिससे समाज के सभी वर्ग बहुत खुश हैं। इसी प्रकार त्रिपुरा, भारत सरकार और मिजोरम के बीच त्रिपक्षीय समझौते से ब्रु-रीन शरणार्थी संकट सफलतापूर्वक हल हो गया है। इसके अलावा मोदी सरकार ने एक वर्ष में अनेक प्रमुख सामाजिक पहलें भी की हैं जैसे गर्भावस्था के दौरान छह महीने की छुट्टी; चिकित्सकीय गर्भ समापन विधेयक, 2020; सहायक प्रजनन तकनीक (नियमन) विधेयक, 2020 तथा यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण कानून में संशोधन।

कोविड-19 से लड़ने में हमने सबसे लंबा और बहुत सख्त लॉकडाउन रखा जिससे देश में न्यूनतम क्षति संभव हो सकी। अनेक क्षेत्रों में हम सक्षम नहीं थे। हमारे यहां कोविड का कोई अस्पताल नहीं था। अब हमारे पास 800 से अधिक ऐसे अस्पताल हैं। हमारे पास कोविड परीक्षण के लिए केवल एक प्रयोगशाला थी और अब हमारे पास ऐसी 300 से अधिक प्रयोगशालाएं हैं। पीपीई सूट, मास्क और यहां तक कि 'स्वाब स्टिक' भी आयात की जा रही थी।

हम आत्मनिर्भर बन गए और अब यह 'मेक इन इंडिया' की एक कहानी है। अब तो भारत में भी वेंटिलेटर का उत्पादन किया जा रहा है। कुल 165 डिस्टलरियों और 962 निमार्ताओं को हैंड सैनिटाइटर बनाने के लिए लाइसेंस दिये गये, जिसके परिणामस्वरूप 87 लाख लीटर हैंड सैनिटाइजर का उत्पादन किया गया। सरकार ने स्वास्थ्य पैकेज के रूप में 15,000 करोड़ रुपये और राज्य आपदा राहत कोष के लिए 11,000 करोड़ रुपये जारी किये ताकि राज्य इस महामारी की चुनौती का मुकाबला बिना उधार पैसा लिए कर सकें। कोविड-19 से लड़ाई में 3000 रेल गाड़ियों से लगभग 45 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके घर वापस भेजा गया है। विदेशों में फंसे हजारों भारतीय निवासियों को भी सफलतापूर्वक निकाला गया है।

मोदी जी सबसे पहले जनता की परवाह करते हैं। अपने पहले ही पैकेज में उन्होंने 80 करोड़ परिवारों को खाद्य सुरक्षा कवर देते हुए उन्हें 25 किलो चावल/गेहूं और 5 किलोग्राम दालें मुफ्त (पांच महीने के लिए) प्रदान की। इसके साथ प्रति माह 5 किलोग्राम चावल/गेहूं, 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम की अत्यधिक रियायती दर पर प्रदान करने की पूर्व योजनाओं को भी जारी रखा गया। लगभग 5 करोड़ गैर-राशन कार्ड धारकों के लिए भी सरकार ने दो महीने के लिए 10 किलोग्राम चावल/गेहूं और 2 किलोग्राम दालें मुफ्त देने की व्यवस्था की। महिलाओं के 20 करोड़ जनधन खातों में 30,000 करोड़ रुपये आये।

प्रत्येक महिला को अपने बैंक खाते में 1,500 रुपये मिले। कुल 8 करोड़ परिवारों को 2,000 रुपये के 3 गैस सिलेंडर मिले। लगभग 9 करोड़ किसानों ने अपने बैंक खातों में 2,000 रुपये प्राप्त किये। इसी प्रकार 50 लाख रेहड़ी-पटरीवालों को प्रत्येक को 10,000 रुपये मिलेंगे। लाखों निर्माण श्रमिकों को निर्माण श्रमिक निधि से कोष मिला। यदि कोई हिसाब लगाए तो हमारे समाज के 10 प्रतिशत सबसे नीचे के तबके के परिवारों को दस-दस हजार रुपये प्राप्त हुए।

विकास का तीसरा हिस्सा है आत्मनिर्भर पैकेज के माध्यम से प्रमुख सुधार। आत्मनिर्भर भारत के पांच स्तंभ हैं - अर्थव्यवस्था, आधारभूत ढांचा प्रणाली, जनसांख्यिकी, और मांग। यह 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज है जो देश की जीडीपी का 10 प्रतिशत है। यह पैकेज समाज के हर वर्ग की परवाह करता है। नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के लिए 2760 करोड़ रूपयों का ईपीआई योगदान कम किया गया। छोटे और मझोले ऋणों पर 2 प्रतिशत ब्याज की वित्तीय मदद दी गयी है। कुल 63 लाख स्वयं सहायता समूहों को 20 लाख रुपये तक का कोलेटरल मुक्त ऋण मिलेगा जो पहले 10 लाख रुपये तक सीमित था।

अधिक कंपनियों को लाभ देने के लिए छोटे और मध्यम उद्योगों की परिभाषा बदली गई है। लघु और मध्यम उद्योगों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को मिला कर उनके लिए 4,45,000 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया हैं। कृषि-आधारभूत ढांचे के कार्यक्रमों के लिए 1,00,000 करोड़ रुपये, साथ ही मत्स्य विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये और मवेशियों में खुर और मुंह की बीमारी के टीकाकरण और उपचार के लिए 15,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं। एक और महत्वपूर्ण चीज 70,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिंक सब्सिडी भी है।

इस पैकेज में सुधार के कई प्रमुख कदम उठाए गए हैं। रक्षा में आत्मनिर्भरता एक ऐतिहासिक पहल है। हम 100 प्रतिशत हथियार आयात कर रहे थे, लेकिन रक्षा क्षेत्र में सीधे विदेशी निवेश की अनुमति नहीं दे रहे थे। मोदी जी ने देश को इस पाखंड से बाहर निकाला और रक्षा उत्पादन में 74 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी। इसके साथ ही भारत में बनने वाले रक्षा पुजरें और हथियारों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया। मनरेगा के लिए 1,00,000 करोड़ रुपये का प्रावधान सबसे अच्छी पहलों में से एक है क्योंकि यह जरूरतमंदों को रोजगार प्रदान करता है और जब प्रवासी श्रमिक वापस आ रहे हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में काम की अधिक मांग होगी। यूपीए सरकार ने मनरेगा पर 37,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च को कभी पार नहीं किया। हमारा पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड औसतन 55,000 करोड़ रुपयों के खर्च का है। अब हमने इसे लगभग दोगुना कर 1,00,000 करोड़ रुपयों का कर दिया है। मोदी सरकार गरीबों की परवाह करती है। उद्योगों को बढ़ाने और करदाताओं के लिए कई रियायतें दी गई हैं।

अन्त में, इस पैकेज का शीर्षक कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार है। किसानों को कृषि विपणन समिति कानून से मुक्त कर दिया गया है। वे जहां चाहें वहां अपना उत्पाद बेच सकते हैं। वे किसी भी समय अपने कृषि उत्पाद और इसके केप्टिव विपणन के लिए किसी से भी जुड़ सकते हैं और उन्हें आवश्यक वस्तु अधिनियम के कई किसान विरोधी प्रावधानों से राहत दी गई है। अब किसानों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा जब बाजार उन्हें अधिक मूल्य प्रदान करता है। ''आत्मनिर्भर पैकेज'' भारत का भविष्य तय करेगा। यह दूरदर्शी, ऐतिहासिक और विवेकपूर्ण पैकेज है।

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