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गोरक्षपीठ गायों से संवारती है किसानों का भविष्य
By विवेक त्रिपाठी | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 3/21/2020 5:02:09 PM
गोरक्षपीठ गायों से संवारती है किसानों का भविष्य

लखनऊ: भारतीय संस्कृति और धर्म में गाय रची बसी है। गाय को यूं ही माता का दर्जा नहीं दिया गया है। यह पौष्टिक दूध प्रदान करने के साथ ही किसानों व गरीबों की दशा संवारने का काम भी करती है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ (गोरखनाथ मंदिर) की गौशाला में पल रहीं गाय के गोबर का उपयोग कर किसानों की जिंदगी संवारी जा रही है।

गोरखनाथ मंदिर में यह काम करीब पांच साल से हो रहा है। यह वही मंदिर या मठ है, जिसके पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ पिछले तीन साल से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।

मंदिर की गोशाला में 400 से अधिक देसी गाय औसतन हर रोज 7200 से 8000 किलोग्राम गोबर देती हैं। यहां गोशाला से सटे वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) की इकाइयों की मदद से गोबर के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही यहां साफ-सफाई के बेहतर इंतजाम पर भी पूरा फोकस रहता है।मुख्यमंत्री योगी की देखरेख में बनीं इन इकाइयों से निकलने वाली खाद मंदिर के पौधों और फूल-पत्तियों की हरियाली तो बढ़ा ही रही है, साथ ही यह जैविक खेती की दिशा में भी क्रांति लाने में सक्षम है।

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक आदित्य प्रकाश द्विवेदी ने कहा, "अन्य जैविक खादों की तुलना में वर्मी कंपोस्ट में पांच गुना नाइट्रोजन, आठ गुना फास्फोरस, 11 गुना पोटाश, तीन गुना कैल्शियम और दोगुना मैग्नीशियम मिलता है। इससे खेत की सांध्रता और पानी सोखने की क्षमता भी बढ़ जाती है। भूमिगत जलस्तर भी बेहतर होता है।"

Tags:

भारतीय संस्कृति,गाय,पौष्टिक,दूध,किसानों,गरीबों,

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