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हाशिये से हकीकत बन रहे वनटांगिया
By विवेक त्रिपाठी | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 3/20/2020 7:19:36 PM
हाशिये से हकीकत बन रहे वनटांगिया

गोरखपुर: पीढ़ी दर पीढ़ी जंगलों में गुजर बसर करते आ रहे वनटांगिया समुदाय के लोग अब तक न सिर्फ अभाव की जिंदगी जीने को विवश थे, बल्कि समाज की मुख्यधारा से जुड़ना इनके लिए सपना था। लेकिन गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इनके विकास के लिए काम कर रहे हैं। यही वजह है कि यह समाज अब हाशिये से हकीकत की ओर बढ़ रहा है।

योगी जब गोरक्षनाथ पीठ के उत्तराधिकारी बने, उसी समय से वनटांगिया समुदाय के उत्थान के लिए काम करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री दीपावली भी इनके बीच ही मनाते हैं।

योगी ने ही साल 2007 में पहली बार वनटांगिया गांव में प्राथमिक विद्यालय खुलवाया था। अब इनके मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां विकास के काम तेज हो गए हैं। गुरु गोरक्षनाथ सेवा संस्थान की ओर से जंगल तीनकोनिया नंबर तीन में संचालित प्राथमिक स्कूल में फिलहाल तीन सौ के करीब बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

गोरखपुर के जंगल तिनकोनिया नंबर तीन, जंगल रामगढ़ रजही, रजही खाले, रजहीं आमबाग और जंगल चिलबिलवा में वनटांगिया समुदाय के लोग निवास करते हैं। यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। अब यहां लोगों को सुविधा देने के लिए तेजी से काम चल रहा है।

गोरखपुर व महराजगंज के वनटांगिया गांवों में बिजली, सड़क और पेयजल का काम तेजी से चल रहा है। इन गांवों में नागरिकों को विधवा पेंशन, वृद्धवस्था पेंशन, छात्रवृत्ति और राशनकार्ड जैसी सुविधाएं मिलनी शुरू हो गई हैं।

गोरखपुर व महराजगंज में वनटांगिया समाज की करीब 50 हजार आबादी वन्य क्षेत्र में निवास करती है। इनमें 30 हजार के करीब मतदाता हैं। अकेले गोरखपुर के चरगावां ब्लॉक में 05 हजार आबादी रहती है। यहां करीब 03 हजार से ऊपर मतदाता हैं।

चरगावां ब्लॉक में इनके पांच गांव हैं। कहने को तो ये गांव थे, लेकिन कोई इनकी सुध लेने वाला नहीं था। रजहीं खाले टोला निवासी रामहेत ने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हम सबके पालक हैं। उनके कारण ही अच्छा जीवन व्यतीत हो रहा है। उन्हीं की बदौलत हम सभी का अस्तित्व बरकरार है। पहले यहां कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं आता था।"

रजहीं के ग्राम प्रधान रणविजय सिंह मुन्ना ने बताया कि वनटांगिया गांवों में विद्युतीकरण का काम लगभग समाप्ति की ओर है। शुद्ध पेयजल के लिए आरओ प्लांट लगाए जा रहे हैं। सड़क निर्माण का काम भी शुरू है। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण होना है। सभी सरकारी सुविधाएं यहां पर मिलने लगी हैं।

गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पांडेय ने बताया, "लोकतंत्र में अगर आप वोटर हैं तभी आपकी पूछ है। वनटांगिया तो आजाद भारत के नागरिक ही नहीं थे। वोटर होना तो दूर की कौड़ी। फिर भी योगी बतौर सांसद वर्षो से इनकी सुधि लेते रहे हैं। वह संसद में इनकी आवाज बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने इनके और इनके जैसे अन्य समुदायों के गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने के साथ उनको केंद्र एवं प्रदेश सरकार की सभी योजनाओं से संतृप्त किया।"

कौन हैं वनटांगिया :

देश के अंदर आजादी के पूर्व वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ब्रिटिश सरकार ने वन्य ग्राम (वनटांगिया गांव) बसाए थे। इन गांवों का उद्देश्य ग्राम समाज और सरकार की गैरजरूरी भूमि पर वन लगाने, उनकी सुरक्षा और उनका विकास करना था। इसके बदले में सरकार ने उन्हें कुछ जमीन दी थी, लेकिन आजादी के बाद इन लोगों का कोई पुरसाहाल नहीं रहा। इस समुदाय के लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, महराजगंज, गोंडा समेत कई जिलों में वास कर रहे हैं। अब इनको विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम योगी सरकार कर रही है।

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पीढ़ी,जंगलों,वनटांगिया,जिंदगी,मुख्यधारा,

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