Saturday 23 November 2019, 02:34 AM
'बदजुबानी' के आगे दफन हो रहे अहम मुद्दे : जमुना प्रसाद बोस
By आर. जयन | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 1/29/2019 1:27:24 PM
'बदजुबानी' के आगे दफन हो रहे अहम मुद्दे : जमुना प्रसाद बोस

लखनऊ: एक समय था, जब सत्तारूढ़ दल के नेता अपने काम-काज और विपक्षी दल सरकार की नाकामी को मुद्दा बनाकर चुनावी समर में उतरा करते थे, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की कहानी बनकर रह गए हैं। अब आलम यह है कि चुनाव नजदीक आते ही सत्तापक्ष और विपक्ष किसान, मजदूर, नौजवान और गांव-गरीब के मुद्दे दफन कर एक-दूसरे पर निजी हमले कर चुनावी परचम लहराने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

इस मसले पर बांदा के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और बुजुर्ग समाजवादी नेता जमुना प्रसाद बोस (94) ने साक्षात्कार के दौरान बेबाकी से अपनी राय रखी।जमुना प्रसाद बोस बांदा विधानसभा सीट से पांच बार विधायक और मुलायम सिंह यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहने के बाद भी अपने परिवार के लिए एक घर भी नहीं बना पाए। आज भी परिवार के साथ बांदा शहर में किराए के घर में रह रहे हैं। सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा विशेषकर महिला नेताओं पर किए जा रहे निजी हमलों से बोस बेहद आहत हैं।

बुजुर्ग नेता कहते हैं, "अब देश में कोई राजनेता नहीं रह गया है। इधर करीब एक दशक के दौरान सत्तापक्ष और विपक्षी दलों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ जिस तरह से व्यक्तिगत टिप्पणियां की जा रही हैं, उससे नहीं लगता कि देश 'डिजटल इंडिया' बन रहा है और तो और, जब देश का प्रधानमंत्री विपक्षी महिला नेताओं पर 'अशोभनीय' टिप्पणी करें तो अन्य नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है?"

बकौल बोस, "किसान, मजदूर, नौजवान और गांव-गरीब के मुद्दे दफन कर नेता अब ऐसे मुद्दे उछाल रहे हैं, जिनसे विकास का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। पहले सत्तापक्ष अगर एक किलोमीटर सड़क बनाकर छोड़ दे तो विपक्ष उसे आगे बढ़ाने को मुद्दा बनाते थे। अब तो 'जर्सी गाय', 'नर है या नारी' और 'चॉकलेट चेहरा' ही असली मुद्दा हो गया है। पता नहीं, ये नेता देश को किस ओर, कहां ले जाना चाहते हैं।" 

अपने समय के राजनीतिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए बोस कहते हैं कि नेहरू से लेकर अटल बिहारी बाजपेयी तक का राजनीतिक काल बेहद खूबसूरत था, तब नेता अपने प्रतिद्वंद्वी की भी तारीफ किया करते थे और यहां तक कि आम जनता से भी अपने विरोधी को जिताने की अपील भी करते थे। ऐसा अटल बिहारी बाजपेयी कर भी चुके हैं। 

जमुना प्रसाद कहते हैं कि चरखा के बगल में फोटो खिचवा लेने या गांधीजी का चश्मा पहन लेने से कोई 'महात्मा गांधी' नहीं बन जाता। इसके लिए गांधी के उन सपनों को साकार करना बहुत जरूरी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'असली भारत शहरों में नहीं, गांवों में बसता है और जब तक गांव-गरीब का विकास नहीं होगा, तब तक देश का विकास संभव ही नहीं है।'

उन्होंने कहा, "देश में आज भी करोड़ों लोग भूखे-नंगे हैं और किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इनके लिए सरकार ने अब तक कोई प्रभावी नीति नहीं बनाई है। नौजवान बेरोजगारी का दंश झेल रहा है तो कर्जदार और अधिक कर्जदार होता जा रहा है।" वह कहते हैं कि तकरीबन सभी दल भ्रष्टाचार में अकंठ डूबे हुए हैं, सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस भी भ्रष्टाचार से अछूती नहीं रहीं।

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सत्तारूढ़ दल,प्रधानमंत्री,विधानसभा,महिला,कैबिनेट,समाजवादी

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