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भारत को जरूरत है 6,000 हेलिकॉप्टर इंजनों की
By डिफेंस मॉनिटर ब्यूरो | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 12/10/2018 2:52:50 PM
भारत को  जरूरत है 6,000 हेलिकॉप्टर इंजनों की
शक्ति इंजन

तकनीकी सहयोग में फ्रांस की सैफ्रान कंपनी सबसे आगे

अनुमान है कि अगले दस साल में भारत को हेलिकॉप्टरों के 6,000 इंजनों की जरूरत होगी। ऐसे में निजी क्षेत्र के पास इन इंजनों के उपकरणों की सप्लाई करने और धातु-विज्ञान (मैटलर्जी) से जुड़ी उच्च तकनीक और प्रक्रियाओं को सीखने का अच्छा मौका है। हेलिकॉप्टरों के इंजनों के लिए खास किस्म की विशेषज्ञता की दरकार होती है, इसलिए इस सीढ़ी पर चढ़ना आसान भी नहीं है।

भारत में हेलिकॉप्टरों के इंजनों की तकनीक लाने के काम में सबसे ज्यादा सक्रिय है फ्रांस की कम्पनी सैफ्रान। देश के एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) के लिए संयुक्त क्षेत्र में गठित सैफ्रान-एचएएल की सफलता के बाद से यह कम्पनी देश में सबसे आगे हो गई है। एचएएल ने पिछले कुछ दशकों में करीब 1,000 हेलिकॉप्टर बनाए हैं। इनमें एएलएच के अलावा चीता और चेतक भी शामिल हैं। इन सब पर फ्रांसीसी इंजन लगे हैं। 

सैफ्रान का भारत से रिश्ता

सैफ्रान हेलिकॉप्टर इंजनों का भारत से रिश्ता 1960 के दशक में जुड़ा था। वर्षों पहले भारत में एयरोस्पातिएल एसए 315बी लामा (चीता) हेलिकॉप्टरों के उत्पादन का समझौता हुआ था, जिसमें सैफ्रान का आर्तूस्ते-2बी इंजन लगा था। इसके बाद एयरोस्पातिएल एल्वेट-3 (चेतक) के निर्माण का समझौता हुआ। उसके बाद से यह रिश्ता खरीदार और बिकवाल के रिश्ते से बढ़कर उत्पादन भागीदारी में तब्दील हो गया। इसके तहत अब देश में 1000 सैफ्रान हेलिकॉप्टर इंजन मौजूद हैं। चेतक के बाद के संस्करणों में सैफ्रान का टीएम-333 इंजन लगा है। 

सन 2003 में इसी टीएम333 इंजन को एचएएल ध्रुव में लगाने के लिए चुना गया। सैफ्रान ने एचएएल के साथ सहयोग को बढ़ाने के लिए टर्बोमेका इंडिया की स्थापना की। सन 1999 में योजना बनने के बाद एचएएल ने अंतत: 'आर्दिदेन1' इंजन का लाइसेंस आधारित इंजन 'शक्ति' का उत्पादन 2007 में शुरू किया। अबतक एचएएल ने 250 शक्ति इंजन बनाए हैं। इन इंजनों का तकरीबन 70 फीसदी काम अब स्वदेशी है। शक्ति इंजन अब एचएएल के सभी हेलिकॉप्टरों के लिए मानक बन गया है। इनमें लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (एलयूएच) भी शामिल है, जिसके विकास का काम अभी चल ही रहा है। इसमें इसी इंजन का एक और संस्करण लगेगा, जिसका नाम है 'आर्दिदेन1यू'।

रोचक बात यह है कि सैफ्रान के इंजन भवष्य की उस भारत-रूस परियोजना में भी शामिल हैं, जिसके तहत एचएएल कामोव के साथ मिलकर 200 कामोव-226-टी हेलिकॉप्टर बनाने जा रहा है। इस हेलिकॉप्टर में सैफ्रान का एरियस 2जीआई इंजन लगेगा। इस समझौते में कामोव को मिली सफलता के पीछे एक बड़ा कारण यह इंजन भी है, क्योंकि भारत का सैफ्रान के साथ संयुक्त उद्योग है। इसका मतलब है कि यदि अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाया भी तो फ्रांसीसी कम्पनी भारत को सीधे इंजनों की सप्लाई जारी रखेगी। 

सैफ्रान दुनिया के सबसे बड़े हेलिकॉप्टर इंजन निर्माताओं में से एक है। दुनिया में बनने वाले तीन में एक इंजन सैफ्रान का होता है। कम्पनी का दावा है कि दुनिया में हर नौ सेकंड में कहीं न कहीं सैफ्रान के इंजन से लैस हेलिकॉप्टर उड़ान भरता है। भारत में अगले एक दशक में सिविल और सैन्य-क्षेत्र में 6,000 हेलिकॉप्टरों की माँग को देखते हुए सैफ्रान का यह रिकॉर्ड और बेहतर हो जाएगा। जाहिर है कि भविष्य उज्ज्वल है। 

एचएएल का अपना इंजन

एचएएल ने 3.5 टन और 5-8 टन वर्ग के हेलिकॉप्टरों में इस्तेमाल के लिए एक स्वदेशी टर्बोशैफ्ट जेट इंजन डिजाइन और विकसित करने की परियोजना शुरू की है। इसका मतलब है कि इसका इस्तेमाल प्रस्तावित लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (एलयूएच) में हो सकेगा, जो 3.5 टन का होगा। एचएएल ऐसे 187 हेलिकॉप्टर बनाने जा रहा है। इस इंजन का इस्तेमाल दो इंजनों वाले हेलिकॉप्टरों में भी किया जा सकता है। यानी कि इसे लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (एलसीएच) और एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) में भी लगाया जा सकता है। ये दोनों भारत की सशस्त्र सेनाओं के मूलधार हैं। एएलएच और एलसीएच में शक्ति इंजन लगे हैं, जिनका विकास एचएएल और सैफ्रान ने मिलकर किया है।  

नए भारतीय इंजन को नाम दिया गया है हिन्दुस्तान टर्बो शैफ्ट इंजन (ऌळरए-1200)। यह समुद्र की सतह पर 1200 किलोवॉट शक्ति पैदा कर सकता है और 7 किलोमीटर की ऊँचाई तक काम कर सकता है। यह परियोजना एचएएल के स्वदेशी संसाधनों से विकसित हुई है और इसका उद्देश्य है टर्बोशैफ्ट इंजनों की स्वदेशी डिजाइन और विकास क्षमता को पैदा करना। 

भारत में सैन्य उड्डयन में जहां हेलिकॉप्टरों की भारी जरूरत होती है, वहां नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में भी हेलिकॉप्टर परिचालन की संभावनाएं बढ़ रही हैं। लिहाजा, आनेवाले समय में सैन्य और नागरिक हेलिकॉप्टरों की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में यदि देश में ही इंजन निर्माण की गति बढ़ती है तो हेलिकॉप्टर परिचालन और भी सहज व लाभकारी हो सकेगा। 

 

 

Tags:

भारत,हेलिकॉप्टरों,मैटलर्जी,विशेषज्ञता,एएलएच,एचएएल,सैफ्रान

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