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भारत के अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों में नौसेना की भूमिका
By डॉ.एस.के.मिश्रा | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 11/28/2017 5:08:13 PM
भारत के अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों में नौसेना की भूमिका

भारतीय नौसेना अपनी बहुआयामी क्षमता, सामरिक सतर्कता और अपने सामरिक, आर्थिक, व्यापारिक व कूटनीतिक हित के क्षेत्रों में अपनी सशक्त एंव सुदृढ़ उपस्थिति के कारण हिन्दमहासागर के क्षेत्र में शान्ति, अमन और स्थिरता बनाये रखने में बेहतरीन काम कर रही है। सामुद्रिक अतिक्रमण व सुरक्षा की जिम्मेदारी भी भारतीय नौसेना बाखूबी निभा रही है। भारतीय नौसेना ने सहयोग व विनियोजन की राष्ट्रीय पहल शक्ति को अपने साथ जोड़कर अपने बेड़ों का नौचालन करते हुए दक्षिण चीन सागर , अफ्रीकी समुद्री क्षेत्र, भूमध्यसागर, अरब सागर एवं हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाती है।

भारतीय नौसेना आज भारत सरकार की 'एक्ट ईस्ट' की नीति को आगे बढाने का एक प्रभावी साधन है। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नौसेना की भूमिका की अपनी  एक पहचान है। समुद्री लुटेरों से व्यापारिक जलयानों को सुरक्षा प्रदान करना और उनके विरुद्ध कठोर कदम उठाने के कारण आज हिन्द महासागर क्षेत्र में पायरेसी की समस्या पर अंकुश लग गया है। एशिया, प्रशान्त और हिन्द महासागर क्षेत्र का भारत की स्वयं की सुरक्षा एवं आर्थिक हितों के दृष्टिकोण से काफी महत्व का है। भारत, अमेरिका एंव जापान ने मिलकर समुद्री सुरक्षा में सक्रिय सहयोग की साझेदारी करके अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों को नया आयाम देने का एक उत्तम उदाहरण कह सकते हैं। 

भारत, अमेरिका तथा जापान के बीच नौसेना सहयोग तीन लोकतन्त्रों के बीच मजबूत लेकिन साथ ही लचीले अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों का प्रतीक है। जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल (खटरऊऋ) की भागेदारी के साथ भारत व अमेरिकी नौसेना के बीच मालाबार अभ्यास का 21 वाँ संस्करण 10 से 17 जुलाई 2017 तक बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया गया। 

नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लंबा ने स्पष्ट रूप से कहा कि समुद्री विवाद समाधान तन्त्र को अधिक प्राथमिकता न देने और निरन्तर बाहुबल के प्रयोग कारण कई स्थानों पर सुरक्षा की स्थिति नाजुक दौर पर पहुँच गयी है। पारस्परिक  विकास हेतु समुद्री संपदा का दोहन सभी देशों के लिए जरूरी है और इसके अंतरराष्ट्रीय समुद्री जल में स्वतंत्र विचरण सुनिश्चित करना होता है। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि समुद्री सुरक्षा का दायरा बहुत बड़ा है और इसमें समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व कानून प्रवर्तन एवं समुद्र क्षेत्र में सही माहौल को बनाये रखने जैसी महत्वपूर्ण स्थितियां निहित है।

हिन्द महासागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए भारतीय नौसेना न केवल सतर्क है बल्कि अपना दबदबा भी बनाए हुए है। चीन की भारत को घेरने के लिए 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल' की नीति का भारत अपनी नौसेना के दम पर भरपूर जवाब देने की स्थिति में है। चीन दक्षिण चीन सागर में अपना दबदबा बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है लेकिन भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया जैसे देशों के बीच बढ़ते तालमेल से चीन के मंसूबों पर लगाम लग सकती है।

नि:सन्देह भारतीय नौसेना की भूमिका एवं उसकी गतिविधियों से जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढता मिलती है। वहाँ दूसरी ओर हिन्द व प्रशान्त क्षेत्र के देशों के साथ आपसी अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों को स्थापित करने में सक्रिय सहयोग व शक्ति मिलती है। भारतीय नौसेना अपनी सैन्य जिम्मेदारियों के साथ ही मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास करते हुए देश की कूटनीति को भी बल प्रदान करती है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर मित्र देशों की मदद के लिए सबसे पहले पहुंच कर भारतीय नौसेना अपने मानवीय कर्तव्यों का भी निर्वहन करती है। नौसेना की इन्हीं कार्यवाहियों से भारत की साख बढ़ती है और जिस देश की साख अच्छी होती है, उसकी आर्थिक प्रगति भी तेज होती है। 

डॉ.एस.के.मिश्रा

 

Tags:

भारतीय नौसेना,सामरिक,नौसेना,सुदृढ़,भूमध्यसागर

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