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सीपीग्राम्स के जरिए शिकायत निवारण प्रणाली में क्रांति
By अमिताभ शुक्ला | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 9/13/2017 4:47:33 PM
सीपीग्राम्स के जरिए शिकायत निवारण प्रणाली में क्रांति

सरकारी कामकाज में सुधार और जवाबदेही लाने के लिए पिछले कई दशकों से बदलाव किए जा रहे हैं। इन बदलावों के कारण आम आदमी को कानूनी जंजाल से निकलने और निचली श्रेणी की नौकरशाही की उपेक्षा से बचने में काफी मदद मिल रही है। उसकी शिकायतों को दूर करने में लगने वाले समय में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 

इसके मद्देनजर नरेंद्र मोदी की सरकार ने वेब आधारित सुविधा 'सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवीयांस र्रिडेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीपीग्राम्स)' की शुरुआत की है। इस नई प्रणाली के जरिए मंत्रालय शिकायतों की निगरानी कर सकता है और समयबद्ध तरीके से शिकायतों को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा लोक शिकायत कॉल सेंटर की भी स्थापना की गई है। केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि वे अपनी वेबसाइटों के जरिए जनता को सुविधाएं प्रदान कर सकें।

इस संबंध में मैं अपने अनुभव को साझा करना चाहता हूं, जो डाक विभाग से संबंधित है। मेरा अनुभव यह है कि मेरे दिवंगत पिता का डाकघर में एक पुराना बचत खाता था। डाकघर के कई चक्कर लगाने के बावजूद मेरी मां को भुगतान नहीं किया गया। कई महीनों तक पत्र व्यवहार चलता रहा, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बिहार के बेतिया स्थित छोटे से डाकघर के पोस्टमास्टर काम करने में आनाकानी कर रहे थे।

उसी दौरान मुझे 'पीजीपोर्टल डॉट जीओवी डॉट इन' का पता चला और मैंने तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा दी। इस काम में सिर्फ 5-7 मिनट लगे। उसके दो घंटे के बाद मेरे मोबाइल फोन नंबर और ई-मेल पर भेजे गए नंबर का इस्तेमाल करके मैंने पोर्टल में लॉग ऑन किया। मुझे बताया गया कि मेरी शिकायत संसद मार्ग स्थित डाक विभाग के लोक शिकायत अधिकारी के पास भेज दी गई है। अगले दिन सुबह पोर्टल पर मुझे अपनी शिकायत की स्थिति की जानकारी मिली कि मेरी शिकायत पटना जीपीओ के लोक शिकायत अधिकारी को प्रेषित कर दी गई है। 

अगले तीन घंटे के अंदर वह शिकायत पश्चिम चंपारण डाक क्षेत्र के निरीक्षक के पास पहुंचा दी गई। यह काम बहुत तेजी से हुआ। शाम तक मेरे पास फोन आया और हमसे कहा गया कि अगले दिन माता जी को लेकर मैं डाकखाने पहुंच जाऊं। मुझे ब्याज सहित 39,480 रुपये का चेक दे दिया गया। 

इस तरह सीपीग्राम्स के जरिए एक नई उम्मीद पैदा हुई है और यह भरोसा होने लगा है कि शिकायतों को जल्द दूर कर लिया जाएगा। अगले दिन मेरी मां ने चेक ले लिया। पहली बार मैंने यह महसूस किया कि आम आदमी को सेवा प्रदान करने के लिए किस तरह से कागजी कार्यवाही, सभी तरह की बाधाओं को व्यवस्था से दूर किया गया है।

दूसरे मामले में मेरा वास्ता डाक विभाग से पड़ा। मेरे पिता की एनएससी मार्च, 2016 में पूरी हो रही थी और उसमें मुझे नामित किया गया था। जिस एजेंट के माध्यम से मेरे पिता ने डाकघर की छोटी बचत योजना में निवेश किया था, उस एजेंट ने कागजी कार्यवाही पूरी करके लाल बाजार के डाकघर में जमा करवा दिया था, जहां से एनएससी खरीदी गई थी। लेकिन पोस्टमास्टर ने दस्तावेजों पर कोई कार्यवाही नहीं की। पीजी पोर्टल के जरिए शिकायत करना महज एक क्लिक की दूरी पर था। इस बार तीन दिनों के अंदर मेरे प्रतिनिधि को चेक दे दिया गया।

सीपीजीआरएएमएस केंद्र या राज्य सरकार से संबंधित किसी भी शिकायत के लिए नई आशा है। केंद्र सरकार के विभागों से संबंधित शिकायतों का निपटारा काफी सक्षम तरीके से किया जाता है। जबकि राज्यों से संबंधित शिकायतों को संबंधित राज्य सरकारों को भेज दिया जाता है। 

भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी ने बताया, "इस कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय निगरानी की जाती है और अधिकारियों के स्तर पर कोई भी ढिलाई सहन नहीं की जाती। क्योंकि विभिन्न स्तरों पर निगरानी की जाती है, इसलिए अधिकारी शिकायतों का निवारण काफी तत्परता के साथ करते हैं। अब सभी को इस बात की जानकारी रहती है कि समस्या कहां पर है।" 

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