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ब्रिक्स का आतंकवाद से निपटने पर जोर, घोषणापत्र में लश्कर, जैश का नाम
By गौरव शर्मा / आईएएनएस | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 9/4/2017 5:10:32 PM
ब्रिक्स का आतंकवाद से निपटने पर जोर, घोषणापत्र में लश्कर, जैश का नाम

शियामेन (चीन): आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के अभियान को एक बड़ी जीत उस वक्त मिली जब सोमवार को ब्रिक्स देशों ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों का नाम अपने घोषणापत्र में शामिल किया और इनसे तथा इनके जैसे तमाम आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। 

ऐसा कहा जाता है कि गोवा में बीते साल हुए आठवें ब्रिक्स सम्मेलन में चीन ने घोषणापत्र में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों को शामिल करने का विरोध किया था। शियामेन घोषणापत्र में कहा गया है, "हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर और तालिबान, इस्लामिक स्टेट (आईएस), अलकायदा और इसके संबद्ध संगठन ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीटीपी और हिज्बुल-तहरीर द्वारा की गई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हैं।"

जेईएम प्रमुख मसूद अजहर को भारतीय सेना के प्रतिष्ठानों पर घातक सीमापार हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। भारत ने अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का रुख किया था लेकिन चीन ने बार-बार इस प्रस्ताव की राह में रोड़ा अटकाया है। 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के लिए लश्कर ए तैयबा जिम्मेदार है। इसमें 166 भारतीयों और विदेशी नागरिकों की मौत हो गई थी।

शियामेन घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों सहित दुनियाभर में हुए सभी आतंकवादी हमलों की निंदा की गई है। घोषणापत्र में कहा गया, "आतंकवाद की सभी रूपों में निंदा की जाती है। आतंकवाद के किसी भी कृत्य का कोई औचित्य नहीं है।"

ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। ब्रिक्स देशों का कहना है कि आतंकवाद करने वाले और इसमें सहयोग देने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। घोषणापत्र में आतकंवाद को रोकने और इससे निपटने के लिए देशों की प्राथमिक भूमिका और जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए जोर दिया गया कि देशों की संप्रभुता और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का सम्मान करते हुए आतंक के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

घोषणापत्र में कहा गया है, "हम आतंकवादी हमलों की निंदा करते हैं, जिस वजह से निर्दोष अफगान नागरिकों की मौत हुई है। इस हिंसा को तत्काल खत्म करने की जरूरत है। हम अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों के तहत अफगानिस्तान में शांति की बहाली और राष्ट्रीय सुलह के लिए लोगों को सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताते है। हम आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए अफगान सुरक्षाबलों के प्रयासों का समर्थन करते हैं।"

घोषणापत्र में कहा गया, "हम सभी देशों से आतंकवाद से निपटने, कट्टरपंथ का खात्मा करने, आतंकवादी संगठनों में भर्तियों (विदेशी लड़ाकों सहित) को रोकने, आतंकवाद का वित्तपोषण बंद करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करते हैं। इनमें धनशोधन, हथियारों की आपूर्ति, नशीले पदार्थो की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियां रोकने, आतंकवादी अड्डों को ध्वस्त करना, आतंकवादियों द्वारा नवीनतम सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) के जरिए सोशल मीडिया सहित इंटरनेट का दुरुपयोग रोकना शामिल हैं।"

घोषणापत्र में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से व्यापक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी गठबंधन की स्थापना करने और इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र की समन्वयक की भूमिका के लिए समर्थन जताने का आह्वान किया गया है।

 

भ्रष्टाचार के विरुद्ध सहयोग मजबूत करेगा ब्रिक्स

 

शियामेन: ब्रिक्स देशों के नेताओं ने सोमवार को यहां घोषणा की कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों को समर्थन देने के लिए बचनबद्ध हैं। यहां 9वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अंत में जारी ब्रिक्स शियामेन घोषणा-पत्र के अनुसार, "हम भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का समर्थन करते हैं, जिसमें ब्रिक्स भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह के जरिए सहयोग बढ़ाना भी शामिल है। इसके साथ ही हम संपत्तियों की वसूली एवं भ्रष्टाचार में वांछित लोगों से संबंधित मामलों में भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।" 

घोषणा-पत्र के अनुसार, "अवैध धन, वित्तीय प्रवाह एवं विदेशों में जमा काला धन समेत भ्रष्टाचार संबंधी अन्य गतिविधियां वैश्विक चुनौती हैं, जो आर्थिक वृद्धि और सतत विकास में नकारात्मक असर डालती हैं।" ब्रिक्स देशों -ब्राजील, रूस, भारत, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका- ने कहा कि वे इस संबंध में अपने सहयोग को समन्वित करने की कोशिश करेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संकल्प और अन्य प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय कानूनी उपायों के आधार पर भ्रष्टाचार से मुकाबला करने और इसे रोकने के लिए एक मजबूत वैश्विक प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेंगे।

 

ब्रिक्स नेताओं ने संरक्षणवाद का विरोध किया

 

शियामेनब्रिक्स नेताओं ने सोमवार को दोबारा से पुष्टि की कि वे एक खुली और समावेशी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं और संरक्षणवाद का ढृढ़ता से विरोध करते हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, 9वें शिखर सम्मेलम के बाद जारी ब्रिक्स शियामेन घोषणा-पत्र में कहा गया है, "हम खुली और समावेशी विश्व अर्थव्यवस्था के महत्व पर जोर देते हैं और चाहते हैं कि वैश्वीकरण के फायदे का हिस्सा सभी देशों और लोगों को मिले।" 

घोषणा-पत्र में कहा गया है, "हम संरक्षणवाद का ढृढ़ता से विरोध करते रहेंगे। हम संरक्षणवादी कदमों को वापस लेने और उसे रोकने के लिए अपने मौजूदा संकल्प के प्रति बचनबद्धता दोहराते हैं और हम दूसरे देशों से इस प्रतिबद्धता में शामिल होने के लिए गुजारिश करते हैं।" 

ब्रिक्स देश -ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका- ने कहा कि वह विश्व व्यापार संगठन के रूप में एक नियम आधारित, पारदर्शी, भेदभाव रहित, खुली और समावेशी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के लिए ढृढ़ता से प्रतिबद्ध है। 

 

मोदी का ब्रिक्स देशों के बीच शांति व विकास के लिए सहयोग बढ़ाने का आग्रह 

 

शियामेन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शांति और विकास के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए ब्रिक्स और अफ्रीकी देशों के बीच क्षमता निर्माण में सहयोग का स्वागत किया। मोदी ने ब्रिक्स देशों के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा, "शांति और विकास के लिए सहयोग महत्वपूर्ण है। नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स देशों की मजबूत भागीदारी विकास और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के साथ ही सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) का समर्थन करने में सहायता कर सकती है।"

उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में गर्मजोशी से स्वागत के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का आभार जताया। प्रधानमंत्री ने स्मार्ट शहरों, शहरीकरण और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हम स्वास्थ्य, स्वच्छता, कौशल, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, लैंगिक समानता सुनिश्चित करने और गरीबी उन्मूलन के मिशन पर हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) सौर ऊर्जा एजेंडे को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि यह किफायती, विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा हमारे देशों के विकास के लिए बेहद जरूरी है। 

मोदी ने कहा, "अक्षय ऊर्जा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।" लोगों के बीच आदान-प्रदान में तेजी लाने की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि इस तरह के परस्पर मेल-मिलाप ने हमारे संबंधों को मजबूत किया है।  उन्होंने कहा कि अनिश्चितता की तरफ बढ़ रहे विश्व में ब्रिक्स ने सहयोग, स्थिरता और विकास का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है।

प्रधानमंत्री ने कौशल, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण और संचार के क्षेत्र में ब्रिक्स और अफ्रीकी देशों के बीच क्षमता निर्माण में सहयोग का स्वागत किया। सम्मेलन में भाग लेने के लिए रविवार को शियामेन पहुंचे मोदी ने कहा, "हमारे केंद्रीय बैंकों को अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए और कॉन्टिजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (ब्रिक्स का एक तंत्र) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।"

उन्होंने विकासशील देशों की संप्रभुता और कॉर्पोरेट संस्थाओं के वित्तपोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी के गठन का आग्रह किया।प्रधानमंत्री ने उत्पादकता गुणक के रूप में महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों पर जोर दिया।उन्होंने कहा, "आज हमारे प्रयासों ने कृषि, संस्कृति, पर्यावरण, ऊर्जा, खेल और आईसीटी (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) के विभिन्न क्षेत्रों को स्पर्श किया है।"

चीन ने ब्रिक्स सदस्यों के अलावा मिस्र, केन्या, ताजिकिस्तान, मैक्सिको और थाईलैंड को शिखर सम्मेलन के विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।  मोदी और शी मंगलवार को ब्रिक्स सम्मेलन के इतर विभिन्न मुद्दों पर बात करने के लिए मुलाकात करेंगे।

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आतंकवाद,तालिबान,इस्लामिक स्टेट (आईएस),अलकायदा,घोषणापत्र,ब्रिक्स

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