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हैदराबाद बन रहा है एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग का केंद्र
By मोहम्मद शफीक | Bharat Defence Kavach | Publish Date: 8/14/2017 12:32:28 PM
हैदराबाद बन रहा है एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग का केंद्र

हैदराबाद: भारत के पहले निजी क्षेत्र के मिसाइल विनिर्माण संयंत्र के यहां शुरू होने के साथ तेलंगाना की राजधानी के नाम एक और तमगा जुड़ गया है और यह विमान निर्माण और रक्षा उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरी है। उद्योग के नेतृत्वकर्ताओं का कहना है कि यह शहर 'मेक इन इंडिया' पहल को पूरा करने की जमीन बन गया है, क्योंकि कई वैश्विक दिग्गजों ने भारतीय कंपनियों के साथ यहां विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है।

इजरायल के राफेल और कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स का संयुक्त उद्यम कल्याणी राफेल एडवांस्ड सिस्टम्स (केआरएएस) यहां भारतीय सेना के लिए तीसरी पीढ़ी के स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) का उत्पादन करेगा। यह अत्याधुनिक संयंत्र रक्षा क्षेत्र में कहे जा रहे सबसे बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का नतीजा है।

हैदाराबाद में स्पाइक मिसाइल के साथ-साथ एयरोस्पेस और रक्षा से जुड़े कई उत्पादों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इस्तेमाल किए जाने हेलीकॉप्टर और एफ-16 लड़ाकू विमानों के केबिन शामिल हैं। कल्याणी समूह के अध्यक्ष बाबा एन. कल्याणी के मुताबिक स्पाइक मिसाइल बनाने के लिए भारतीय सेना की तरफ से शुरुआती ऑर्डर हजारों का है और इसका मूल्य एक अरब डॉलर से अधिक है। 

इस संयंत्र को देश के मिसाइल हाउस के रूप में बनाने की योजना बनाई गई है और इजरायली रक्षा कंपनी के साथ मिलकर कुछ अन्य मिसाइलों के उत्पादन का भी प्रस्ताव है। केआरएएस ने हैदराबाद को भारत में अपने मिसाइल निर्माण के केंद्र के रूप में इसलिए चुना है क्योंकि यहां कई सरकारी/निजी रक्षा प्रयोगशालाएं और मिसाइल निर्माण संयंत्र हैं। 

बाबा कल्याणी बताते हैं, "हैदराबाद के मिसाइल उत्पादन और शोध व विकास केंद्र इस शहर को इस क्षेत्र का स्वाभाविक पारिस्थितिकीय तंत्र के रूप में स्थापित करते हैं।" तेलंगाना के उद्योग मंत्री के. टी. रामाराव का मानना है कि केआरएएस हैदराबाद के रक्षा इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को अगले स्तर तक पहुंचा देगा।उन्होंने कहा, "हैदराबाद के पास रक्षा और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स का नंबर एक गंतव्य बनने के लिए सभी साजो-सामान है।"

हैदराबाद में एयरोस्पेस और रक्षा से जुड़ी करीब 1,000 छोटी और मझोली कंपनियां है। रामाराव बताते हैं, "फ्रांस की न्यूक्लियर पनडुब्बियों के कई पूर्जे हैदराबाद के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र से खरीदे गए हैं।" टाटा एडवांस सिस्टम लि. (टीएएसएल) ने वैश्विक दिग्गजों के साथ भागीदारी में हैदराबाद में अपनी इकाई स्थापित की है, जिसने हैदराबाद को इस क्षेत्र का प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है। 

टीएएसएल ने जून में अमेरिकी रक्षा दिग्गज लॉकहीड मार्टिन के साथ 70 एफ-16 लड़ाकू विमान बनाने के लिए समझौता किया था। एएएसएल और लॉकहीड मार्टिन का पहले से ही एक संयुक्त उद्यम है जो सी-130जे सुपर हरकुलिस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के पुर्जे बनाती है। 

टीएएसएल ने इसके अलावा दुनिया की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग से हाथ मिलाया है। दोनों मिलकर एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और सीएच-47 चिनूक हैवी-लाइफ हेलीकॉप्टर के एयरोस्ट्रकचर का निर्माण करेंगी। टीएएसएल, सिकोरस्काई के साथ एक संयुक्त उद्यम में एस-92 हेलीकॉप्टरों के केबिन का उत्पादन करेगी। 

एयरक्राफ्ट विनिर्माण की प्रमुख कंपनी प्रैट एंड विटनी ने अमेरिका और चीन के बाद अपना तीसरा वैश्विक केंद्र हैदराबाद हवाईअड्डे के पास स्थापित किया है, ताकि एयरक्राफ्ट इंजीनीयर्स और टेक्नीशियनों को प्रशिक्षण मुहैया कराया जा सके।
इस साल की शुरुआत में यूरोपीय एयरोस्पेस दिग्गज एयरबस ने तेलंगाना सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था, जिसके तहत राष्ट्रीय कौशल विकास निगम और एयरोकैंपस फ्रांस मिलकर हैदराबाद में एयरोस्पेस कौशल विकास केंद्र स्थापित करेंगे। 

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भारत,मिसाइल,निर्माण,तेलंगाना,इजरायल,अत्याधुनिक,इलेक्ट्रॉनिक,रक्षा

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