
हैदराबाद : हाल ही में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित, 5,000 किलोमीटर मारक क्षमता वाली परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल, अग्नि-5 के विकास में प्रमुख भूमिका निभाने वाली वैज्ञानिक टेसी थॉमस का मानना है कि किसी महिला के इस तरह के काम से जुड़े होने में कोई बुराई नहीं है।
थॉमस ने इस मिसाइल का विकास करने वाली टीम को दिशानिर्देश देने का काम किया था। वह इसे शांति का हथियार मानती हैं और कहती हैं कि विज्ञान में कोई लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता।अग्नि श्रेणी की सभी मिसाइल परियोजनाओं से जुड़ीं, थॉमस ने अग्नि-4 की टीम का नेतृत्व परियोजना निदेशक (वाहनों व मिशन) के रूप में किया था और अग्नि-5 की टीम का नेतृत्व परियोजना निदेशक (मिशन) के रूप में किया था।
पिछले सप्ताह हुए अग्नि-5 के सफल परीक्षण बाद, थॉमस ने आईएएनएस के साथ यहां विशेष बातचीत में कहा, "विज्ञान में कोई लिंगभेद नहीं होता, क्योंकि विज्ञान को पता नहीं होता कि उसके लिए कौन काम कर रहा है। जब मैं काम करने जाती हूं तो महिला नहीं रह जाती। मैं सिर्फ वैज्ञानिक रह जाती हूं।
"ज्ञात हो कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में पुरुषों की जमात में इस अनोखी महिला वैज्ञानिक (49) ने देश के अति सक्षम अंतरद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल को तैयार करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।साड़ी में लिपटी थॉमस ने कहा कि अतीत में डीआरडीओ के वैज्ञानिक समुदाय में दो-तीन प्रतिशत महिलाएं थीं।
"अब महिलाओं की संख्या 12 से 15 प्रतिशत है। यह बदलाव 20 वर्षो में हुआ है।"टेसी ने कहा कि अग्नि-5 मिसाइल के सफल प्रक्षेपण से 2,000 से अधिक वैज्ञानिकों का सपना साकार हो गया है, जो इसपर पिछले तीन वर्षो से काम कर रहे थे। "यह एक महान क्षण था। हमारे यहां कई वैज्ञानिक हैं जो विभिन्न प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहे हैं।
"अग्नि-5 की सफलता के बाद थॉमस ने मल्टिपल इंडिपेंडेंट रि-एंट्री व्हिकल्स (एमआईआरवी) पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। "हम एमआईआरवी प्रणाली के लिए एक नई प्रौद्योगिकी के बारे में सोच रहे हैं। हमने एकल रि-एंट्री व्हिकल के जरिए अग्नि-5 को सफल किया है। हम अब मल्टिपल रि-एंट्री व्हिकल के बारे में सोच रहे हैं।"थॉमस का कहना है कि एक महिला ही- उनकी मां- उनके लिए प्रेरणा बनी।
लेकिन वह अपने पिता को भी बहुत याद करती हैं। जब वह कक्षा 8वीं में थीं, तभी उनके अकाउंटेंट पिता को लकवा मार गया। निधन तक (1991) वह अपने घर में ही रहे। टेसी ने कहा, "वाकई में पिताजी मुझे बहुत याद आते हैं, क्योंकि जब मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई का निर्णय लिया, तो वहीं थे, जिन्होंने स्वीकृति दी और हौसला बढ़ाया। मेरा करियर शुरू होने तक मेरे निर्णय के हर कदम पर वह मेरे साथ रहे।
"थॉमस ने कहा, "मेरे पिता का गणित बहुत अच्छा था और वह बहुत विद्वान थे। मेरी मां एक योग्य शिक्षिका है लेकिन वह कभी भी किसी भी स्कूल में पढ़ाने नहीं गईं। उन्होंने हम छह भाई-बहनों (पांच बहन, एक भाई) को पढ़ाने में ही अपना सारा प्रयास लगाया।"केरल के अलप्पुझा में रह रहीं अपनी मां, कुंजम्मा थॉमस के बारे में उन्होंने कहा, "मेरी मां के पास मेरे बीमार पिता और हम सभी की देखभाल करने की इच्छाशक्ति थी।
आज वह 75 वर्ष की हैं और एक मां के रूप में वह हमसभी को प्रेरित करती हैं।"थॉमस, देश में प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम के जनक, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को वैज्ञानिकों में अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। क्या थॉमस संहार की व्यापक क्षमता वाले हथियारों के विकास में किसी महिला के काम करने में विरोधाभास नहीं देखतीं? उन्होंने कहा, "सेना और सभी सेवाओं में महिलाएं काम कर रही हैं। इसमें क्या गलत है?"इसके विपरीत थॉमस मिसाइल को शांति का हथियार मानती हैं। उन्होंने कहा, "यदि आप सशक्त हैं तो कोई भी आपको छूने का साहस नहीं कर पाएगा।