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भुवनेश्वर/नई दिल्ली : भारत ने गुरुवार को लम्बी दूरी की परमाणु क्षमता युक्त बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर है और इसकी जद में चीन के कई हिस्से और पाकिस्तान का पूरा क्षेत्र आएगा। इसे 'चाइना किलर' भी कहा जा रहा है। लेकिन चीन ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ली वीमिन ने कहा कि भारत, चीन का प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी है। उन्होंने कहा, "चीन को भारत के मिसाइल परीक्षण के बारे में जानकारी है। भारत और चीन, दोनों उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश हैं। हम प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं।"
चीन के सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने हालांकि इसके लिए भारत की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के पास चीन के ज्यादातर हिस्सों के लक्ष्यों तक पहुंच सकने वाली मिसाइलें हो सकती हैं लेकिन समग्र हथियारों की दौड़ में वह चीन के सामने कहीं नहीं टिकता। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत को अपनी क्षमता का आकलन बढ़ाचढ़ाकर नहीं करना चाहिए।
मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के भद्रक जिले के व्हीलर द्वीप से सुबह 8.07 बजे किया गया। इसके साथ ही भारत इस तरह की मिसाइल क्षमता से युक्त दुनिया के देशों के विशेष समूह में शामिल हो गया। इससे पहले यह क्षमता सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास थी। भारत को अग्नि-5 मिसाइल को बनाने में चार साल का समय लगा।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मिसाइल के सफल परीक्षण की सराहना करते हुए इसे देश की सुरक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में नए आयाम तलाशने की दिशा में मील का पत्थर बताया। उन्होंने इसके लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को बधाई दी।
इससे पहले परीक्षण स्थल पर डीआरडीओ के प्रमुख वी. के. सारस्वत ने कहा, "तीन चरणों वाली अग्नि-5 मिसाइल की पूरी क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन हुआ। मिशन से सम्बंधित सभी उद्देश्य व परिचालन लक्ष्य हासिल हुए हैं।"
उन्होंने कहा, "भारत आज एक ऐसा राष्ट्र बन गया है जिसने लम्बी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का डिजाइन, उसका विकास व उत्पादन कर अपनी क्षमताओं को सिद्ध किया है। अब भारत मिसाइल शक्ति बन गया है।"
परीक्षण रेंज के निदेशक एस. पी. दाश ने आईएएनएस से कहा, "यह अद्भुत परीक्षण था। मिसाइल ने बहुत सटीकता के साथ लक्ष्य को निशाना बनाया।"
गुरुवार के परीक्षण के दौरान 17.5 मीटर लम्बी अग्नि-5 मिसाइल को 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाया गया और उसे 7,000 मीटर प्रति सेकंड के वेग के साथ इस्तेमाल किया गया, ताकि वह अपने लक्ष्य को निशाना बना सके।
मिसाइल परीक्षण के तुरंत बाद रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने सारस्वत व अग्नि-5 परियोजना के निदेशक अविनाश चंदर से बात की और उन्हें इस सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को अपने रक्षा वैज्ञानिकों पर गर्व है। उन्होंने डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख एम. नटराजन के अथक योगदान को भी याद किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी अग्नि-5 के सफल परीक्षण पर गर्व जताया। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने एक बयान में कहा कि इस परीक्षण से भारत विशेष देशों की श्रेणी में आ गया है।
अग्नि-5 की क्षमता अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) की मारक क्षमता से 500 किलोमीटर कम है। दुनियाभर में आईसीबीएम के लिए 5,500 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता मान्य है।
भारत के पड़ोसी चीन के पास 11,500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल डेंग फांग-31ए है, जो दक्षिण एशिया में कहीं भी निशाना साध सकती है।
अग्नि-5 को 2014 के अंत तक सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने से पहले उसे परीक्षणों की एक श्रृंखला से गुजारा जाएगा। यह मिसाइल भारत को चीन में अंदर तक व पूरे पाकिस्तानी क्षेत्र में लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता प्रदान करती है।
वैसे भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल न करने की अपनी नीति पर कायम है। अग्नि-5 व नवंबर 2011 में परीक्षण की गई अग्नि-4 मिसाइलें भारत के दुश्मनों के सामने उसके खिलाफ परमाणु हमले के लिए बाधा खड़ी करती हैं।
अग्नि-5 का सफल परीक्षण, मिसाइल शक्ति बना भारत
नई दिल्ली : भारत ने गुरुवार को लम्बे समय से प्रतीक्षारत अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण कर इतिहास रच दिया। अग्नि-5 लम्बी दूरी
कीपरमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 5,000 किलोमीटर से भी दूर के लक्ष्य को निशाना बना सकती है। इस परीक्षण के साथ ही भारत उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है जो पहले से ही इस क्षमता से सम्पन्न हैं। अमेरिका, रूस व चीन के बाद भारत ऐसा चौथा देश है जिसके पास इस तरह की मिसाइल है।
ओडिशा के भद्रक जिले के व्हीलर द्वीप से यह परीक्षण किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) प्रमुख वी.के. सारस्वत ने यहां परीक्षण स्थल पर संवाददाताओं के बताया कि मिसाइल परीक्षण गुरुवार सुबह 8.07 बजे हुआ।
सारस्वत ने कहा, "भारत आज एक ऐसा राष्ट्र बन गया है जिसने लम्बी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का डिजाइन बना, उसका विकास व उत्पादन कर अपनी क्षमताओं को सिद्ध किया है। अब भारत मिसाइल शक्ति बन गया है। तीन चरणों वाली अग्नि-5 मिसाइल की पूरी क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन हुआ। मिशन से सम्बंधित सभी उद्देश्य व परिचालन लक्ष्य हासिल हुए हैं।"
अग्नि-5 को सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने से पहले उसे परीक्षणों की एक श्रृंखला से गुजारा जाएगा। लेकिन यह मिसाइल भारत को दक्षिण एशिया के दूरस्थ लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता प्रदान करती है।
अग्नि-5 का सफल परीक्षण
भुवनेश्वर : भारत की स्वदेशी-अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 का गुरुवार को सफल परीक्षण हो गया है।
पहले यह परीक्षण बुधवार को होना था लेकिन खराब मौसम के चलते इसे गुरुवार तक के लिए टाल दिया गया था।
पांच हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के भद्रक जिले के ह्वीलर्स द्वीप से किया गया।
पाकिस्तानी वेबसाइट्स पर भारतीय मिसाइल
परीक्षण को प्रमुखता
इस्लामाबाद : भारत में लम्बी दूरी की परमाणु क्षमता सम्पन्न बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 के सफल परीक्षण के मिनटों बाद ही पाकिस्तानी
वेबसाइट्स पर यह खबर छा गई।
भारत ने गुरुवार को अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल 5,000 किलोमीटर से दूर के लक्ष्यों को सटीकता के साथ निशाना बना सकती है। इस परीक्षण के साथ ही भारत इस क्षमता से सम्पन्न राष्ट्रों के विशेष समूह में शामिल हो गया है।
'न्यूज इंटरनेशनल' पर एक एजेंसी के समाचार को 'इंडिया सक्सेसफुली टेस्ट्स अग्नि-5 मिसाइल' शीर्षक के साथ प्रकाशित किया गया। इस समाचार के साथ वेबासाइट पर अग्नि-5 की गणतंत्र दिवस परेड के दौरान दिल्ली में ली गई तस्वीर भी जारी की गई।
पाकिस्तान के एक प्रमुख दैनिक 'डॉन' ने 'इंडिया टेस्ट्स लांग-रेंज न्यूक्लीयर-कैपेबिल मिसाइल: सोर्स' शीर्षक नाम से एक एजेंसी समाचार चलाया। समाचार में एक रक्षा सूत्र के हवाले से कहा गया है कि यह मिसाइल चीन में किसी भी स्थान पर एक टन परमाणु मुखास्त्र पहुंचाने में सक्ष्म है।
समाचार के साथ भारतीय राज्य ओडिशा में अग्नि-5 के परीक्षण की तस्वीर जारी की गई है।
प्रधानमंत्री ने अग्नि-5 के सफल परीक्षण की सराहना की
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को परमाणु क्षमता युक्त अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल के सफल परीक्षण की सराहना करते हुए इसे देश की सुरक्षा की तलाश, तैयारियों और विज्ञान में नए क्षेत्रों का पता लगाने की दिशा में एक और मील का पत्थर करार दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा अन्य संगठनों के सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने देश की रक्षा और सुरक्षा को सशक्त बनाने के हमारे प्रयासों की दिशा में अनथक प्रयास किया।"
उन्होंने कहा, "अग्नि-5 का आज का सफल परीक्षण हमारी सुरक्षा और तैयारियों तथा विज्ञान की सीमाओं को जानने की हमारी जद्दोजहद का एक और मील का पत्थर है। वैज्ञानिक समुदाय का सम्मान करने के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा है।"
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ट्विटर पर दी गई जानकारी के अनुसार मनमोहन सिंह ने डीआरडीओ के प्रमुख वी. के. सारस्वत से फोन पर बात करके उन्हें बधाई दी।
ओडिशा के व्हीलर द्वीप से सुबह 8.07 बजे अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। मिसाइल ने 5000 किलोमीटर दूरी पर सटीक निशाना भेदा। इसके साथ ही भारत, अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की कतार में शामिल हो गया है।