शिमला : हिमाचल प्रदेश में भूकम्प से 105 वर्ष पूर्व क्षतिग्रस्त हुए मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है। नये मंदिर का निर्माण प्राचीन स्वरूप में किया जा रहा है और इस महीने के अंत तक इसे लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। यह मंदिर स्थानीय देवी भद्रकाली की है। भरारी देवी का यह मंदिर कांगड़ा जिले के धर्मशाला कस्बे में स्थित है। कांगड़ा घाटी में 1905 में आए भयंकर भूकम्प में यह मंदिर एक तरफ झुक गया। इस विनाशकारी भूकम्प में करीब 20000 लोग मारे गए थे। प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था इंटेक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) की हिमाचल प्रदेश शाखा की संयोजक मालविका पठानिया ने आईएएनएस को बताया, "मूल मंदिर के ध्वस्त होने के बाद मूल स्थान पर ही नये मंदिर का पुनर्निर्माण मूल आकृति के अनुसार किया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि मूल स्थान से पत्थरों एवं ईंटों को हटाकर प्रलेखित कर लिया गया है। 2006 में पुनर्निर्माण से पहले इंटेक के लखनऊ स्थित संस्थान भारतीय संरक्षण संस्थान ने मंदिर के मूल वास्तु को सुनिश्चित करने के लिए शोध किया था। पठानिया ने कहा, "चूंकि मूल निर्माण में सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया था इसीलिए पुनर्निर्माण में सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया।" इस मंदिर का संरक्षक राज्य सरकार का भाषा, कला और संस्कृति विभाग है। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए सात लाख रुपये का अनुदान भी इंटेक को दिया था। इस कार्य के लिए ओडिशा से प्रशिक्षित कारीगर आए हैं। मंदिर के 88 वर्षीय पुजारी विदु राम ने कहा कि मंदिर कब का बना है इसकी जानकारी तो नहीं है लेकिन उनके पूर्वज इसके पुजारी थे। उन्होंने बताया, "जब मंदिर झुक गया तब भी धार्मिक प्रक्रियाएं नियमत: होती रहीं। जब यह ढह हो गया तब मूर्तियों को अस्थाई मंदिर में रख दिया गया।"
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