भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के मद्देनजर अमेरिका ने मंगलवार को भारत को और अधिक सैन्य सामग्री बेचने तथा उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी में भागीदारी की पेशकश की है।
भारत की तीन दिन की यात्रा पर आईं अमेरिकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा के साथ एक प्रेस वार्ता में कहा, “ रक्षा प्रौद्योगिकी के मामले में अमेरिका भारत को उन्नत प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धी दामों पर बेचना चाहता है। ऐसी बिक्री का अपना अलग महत्व है। साथ ही इससे भारत और अमेरिका की सेनाएं साथ मिल कर समुद्र की निगरानी या आपदा प्रभावित लोगों को मदद जैसे जो काम करना चाहती हैं, उसमें भी मदद मिलेगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री दोनों देशों के बीच दूसरी रणनीतिक वार्ता में भाग लेने आई हैं। पहली वार्ती जून 2009 में वाशिंगटन में हुई थी और अगली वार्ता भी अगले वर्ष वाशिंगटन में होगी।
दोनों पक्षों द्वारा जारी एक संयुक्त वक्तव्य में भारत को रक्षा सामग्री की बिक्री का जिक्र भी किया गया है। पिछले एक दशक में अमेरिका
कंपनियों को भारत से 8 अरब डालर मूल्य की सैन्य सामग्री का आर्डर मिल चुका है। जबकि इससे पहले दोनों देशों के बीच सैन्य सामग्री की बिक्री नगण्य थी। दोनों पक्षों ने महसूस किया है कि यह बिक्री सहयोग में आ रही मजबूती प्रदर्शित करती है। दोनों पक्षों ने रक्षा सामग्री के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन में सहयोग की इच्छा जाहिर की है।
कुछ माह पूर्व भारत ने 42 हजार करोड़ रुपये के 126 लड़ाकू विमानों के सौदे से दो अमेरिकी कंपनियों-बोइंग और लॉकहीड मार्टिन को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इससे अमेरिका नाराज था लेकिन अब उसने इस मुद्दे को पीछे रखने का मन बना लिया है। वैसे भी हाल ही में अमेरिका की बोइंग कंपनी को दस सी-17 विमानों के लिए 4.1 अरब डालर (करीब 18 हजरा करोड़ रुपये) का सौदा भारत ने दिया है।
भारत ने अमेरिका से 2.1 अरब डालर मूल्य के आठ पी8आई पोजेडॉन समुद्री टोही विमान खरीदे हैं। इसके अलावा जलाश्व पोत खरीदा। जल्दी ही 140 अल्ट्रा लाइट तोप एम777 का आर्डर भी अमेरिका को मिलना है। जगुआर विमानों के लिए 306 इंजनों का सौदा भी अमेरिका से होना है। भारत ने अमेरिका से 1.2 अरब डालर मूल्य के छह सी-130 जे सुपर हर्क्यूलिस विमान भी खरीदे हैं जो स्पेशल फोर्सेस के काम आएंगे।भारत वायुसेना के लिए 22 अटैक और 15 हेवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर खरीदने जा रहा है। इसके लिए भी अमेरिकी कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा में हैं।
भारत और अमेरिका के बीच अत्याधुनिक सैन्य सामग्री की बिक्री में अड़चन दो बड़े प्रतिबंधात्मक कानून हैं। पहला कानून है- कम्युनिकेशन इंटरआपरेबिलिटी एंड सिक्यूरिटी मेमोरेंडम (सिस्मोआ), दूसरा है- बेसिक एक्सचेंज एंड कोआपरेशन एग्रीमेंट फॉर जियोस्पेशियल कोआपरेशन (बेका) भारत ने इन कानूनों को मानने के करार पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ये कानून सैन्य सामग्री और संक्रिया की गोपनीयता से समझौते को मजबूर करते हैं और भारत इसके लिए तैयार नहीं है।