
नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने एयर इंडिया के 101 बर्खास्त पायलटों की बहाली में विमानन कम्पनी की ओर से हो रही देर पर एयर इंडिया प्रबंधन को सोमवार को कड़ी फटकार लगाई। न्यायालय ने पूछा कि बर्खास्त पायलटों को बहाल करने में आखिर कितना वक्त लगेगा?
न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल ने एयर इंडिया की ओर से पेश हुए वकील ललित भसीन से कम्पनी प्रबंधन से यह पूछने के लिए कहा कि बर्खास्त पायलटों की बहाली के लिए गठित समिति क्या चार सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी? उन्होंने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तिथि निर्धारित की।
न्यायालय ने यह निर्देश पायलटों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी. ए. सुंदरम के यह बताए जाने के बाद दिया कि हाल ही में अपनी हड़ताल समाप्त करने वाले पायलटों के साथ सुलह की प्रक्रिया जारी है, लेकिन प्रबंधन बर्खास्त कर्मचारियों को फिर से सेवा में लेने की दिशा में कुछ नहीं कर रहा।
वहीं, एयर इंडिया के वकील भसीन ने कहा कि पायलटों की बहाली में तीन महीने का समय लग सकता है, क्योंकि इस सम्बंध में गठित समिति को एक-एक मामले का निपटान करना है।इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताई।
न्यायमूर्ति खेत्रपाल ने पायलटों की बहाली में हो रही देरी पर नाखुशी जताते हुए कहा, "ऐसा लगता है कि एयर इंडिया प्रबंधन सबकुछ अपने फायदे के अनुसार करना चाहता है। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है?"न्यायालय ने पूछा, "इन पायलटों को कैसे और कब बहाल किया जा रहा है?
उन्हें कब तक इंतजार करना होगा। उन्होंने आपके समक्ष कोई मांग भी नहीं रखी है।"एयर इंडिया प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए न्यायालय ने कहा, "आपने न्यायालय को पायलटों की बहाली के मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया था और उसी आधार पर न्यायालय ने आदेश पारित किया था। अब आप सख्त रवैया अपना रहे हैं।
"एयर इंडिया प्रबंधन के रुख का बचाव करते हुए विमानन कम्पनी के वकील भसीन ने न्यायालय से कहा कि पायलटों की बहाली पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
वहीं, पायलटों के वकील ने कहा कि उनकी बहाली की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जानी चाहिए।