
नई दिल्ली : जनसंख्या वृद्धि के मामले में चीन से होड़ कर रहे भारत में जनसंख्या नियंत्रण अभियान महिला केंद्रित बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए समाज को सजग करने की जरूरत है। भारत की आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही है,
उससे संकेत मिलता है कि अगले डेढ़ दशकों में वह चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। दुनिया की 17.31 फीसदी आबादी भारत में रहती है और 1.58 फीसदी की मौजूदा जनसंख्या वृद्धि दर से वह 2030 तक 1.53 अरब आबादी के साथ सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा।
वर्ष 2011 की ताजा जनगणना के मुताबिक वर्ष 2060 से पहले भारत की जनसंख्या वृद्धि दर स्थिर नहीं हो पाएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में परिवार नियोजन का ढर्रा हमेशा से दोषपूर्ण रहा है और परिवार नियोजन के अधिकांश लक्ष्यों के लाहासिल होने की यही वजह है।
सेंटर फॉर हेल्थ एंड सोशल जस्टिस में एडवोकेसी ऑफिसर लीना उप्पल कहती हैं, "हमारे देश में परिवार नियोजन की जिम्मेवारी मूलत: महिलाओं पर डाल दी गई है। प्रजनन और प्रजनन नियंत्रण से मूलत: महिलाओं को ही जोड़कर देखा जाता है।
जब तक पुरुषों की इसमें समान भागीदारी नहीं बढ़ेगी, आबादी के स्थिर होने में हमें दशकों का इंतजार करना पड़ेगा।" उनका मानना है कि जनसंख्या से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दि लक्ष्य को भी कमोबेश महिला केंद्रित बना दिया गया है।
प्रजनन रोकने के लिए वंध्यीकरण (स्टेरिलाइजेशन) के दौर से जितनी बड़ी संख्या में महिलाओं को गुजरना पड़ता है, उतनी बड़ी संख्या नसबंदी कराने वाले पुरुषों की नहीं है। उप्पल कहती हैं, "नसबंदी को मर्दानगी और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जाता।
आम धारणा है कि प्रजनन रोकने का दायित्व महिलाओं का है, पुरुषों का नहीं। यह जागरूकता की कमी को दर्शाता है और हमारी सरकारी नीति भी इस भेदभाव को दूर नहीं कर पा रही है।
" पोपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया में संयुक्त निदेशक (एडवोकेसी) सोना शर्मा कहती हैं, "जनसंख्या नियंत्रण के सरकारी एवं गैर-सरकारी दोनों तरह के कार्यक्रमों को महिलाओं पर फोकस कर दिया गया है।
ऐसा लगता है कि जैसे प्रजनन दर घटाने या जनसंख्या को काबू में करने का दायित्व सिर्फ महिला का है। सच यह है कि परिवार में निर्णय के अधिकार भाई, पिता और पति को मिले हुए हैं, इसलिए ज्यादातार मामलों में महिलाओं को ही प्रजनन रोकने के उपायों या सर्जरी से गुजरना होता है। लेकिन यह जिम्मेवारी पुरुषों की भी है।