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May 19, 2013
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  • प्राचीन गणतंत्र की खोज में खनन!
  • Jun 26 2012 2:53:13:587PM
  • by आईएएनएस
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  • प्राचीन

    पटना : माना जाता है कि पूरे विश्व में गणतंत्र की शुरुआत बिहार के वैशाली से हुई थी, मगर इसके पुख्ता साक्ष्य अब तक नहीं मिले थे। वर्तमान समय में विशाल गढ़ की खुदाई के बाद हालांकि इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि सचमुच वैशाली में ही प्रथम गणतंत्र की स्थापना हुई थी।

    इतिहासकारों के अनुसार विशालगढ़ की स्थापना राजा विशाल द्वारा की गई थी। इसके बाद कालांतर में इस इलाके में कई तरह के फेर-बदल होने के भी स्पष्ट प्रमाण मिल रहे हैं। खनन कार्य अभी भी जारी है।

    वैशाली गांव के समीप राजा विशाल का गढ़ 81 एकड़ भूमि में फैला है जिसे एक प्राचीन संसद (सभा भवन) का अवशेष माना जा रहा है। यहां की खुदाई से शुंग वंश के समय की मिट्टी की बनी हुई प्राचीन सुरक्षा दीवार मिली है जबकि कुषाण काल में इसके ऊपर पक्की ईंटों का घेरा बना दिए जाने का स्पष्ट प्रमाण मिलता है।

    यह दीवार 60 मीटर लम्बी और चार मीटर चौड़ी है। खनन के बाद स्पष्ट प्रमाण मिला है कि कालांतर में इस क्षेत्र के लोगों का नगरीय क्षेत्र में परिवर्तन हो चुका था। यहां घरों से पानी निकासी के लिए नाली होने के प्रमाण मिले हैं तो कुएं जैसी खाई का प्रयोग कूड़ेदान के रूप में होने का पुख्ता सबूत मिला है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पटना सर्किल के निदेशक और इस खनन के प्रभारी एस़ क़े मंजुल का कहना है कि हाल में हुई खुदाई में यह सबसे बड़ा निष्कर्ष सामने आया है। वह कहते हैं कि खनन के दौरान मिलने वाली वस्तुएं हमें उत्सासहित करती हैं। इन वस्तुओं को लिच्छवी गणतंत्र से जोड़कर देखा जा रहा है।

    वह कहते हैं कि यहां मिली वस्तुओं से यह प्रमाण मिलता है कि यहां धर्मनिरपेक्ष शासनकाल रहा होगा। यहां अब तक किसी भी देवी-देवता की मूर्तियां नहीं मिली हैं। वह कहते हैं कि प्रमाण से यह स्पष्ट है कि गढ़ के आसपास चारों तरफ बस्तियां होंगी जहां उत्तम जनसुविधाएं रही होंगी।

    खनन शिविर के प्रभारी और सहायक पुरातत्वविद् सचिन कुमार तिवारी कहते हैं कि मिट्टी की दीवार और ईंट की दीवार के नजदीक खाई से यह बात साफ है कि क्षेत्र को आक्रमणकारियों से बचाने के लिए खाई का निर्माण कराया गया होगा।उल्लेखनीय है कि अब तक मिली वस्तुओं से स्पष्ट है कि लगभग 600 वर्ष पहले यहां लिच्छवी गणराज्य था।

    शुंग वंश का समय ईसा पूर्व 185 वर्ष माना जाता है।तिवारी कहते हैं कि शुंग की अवधि के दौरान (185 ईसा पूर्व से 73 ईसा पूर्व तक) यहां मानव बस्ती के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। खनन में छोटी मूर्तियां, चमकदार बर्तनों, छिद्रित तांबे के सिक्के के प्रमाण मिले हैं जो लिच्छवी गणराज्य में होते थे।वैशाली इतिहास में कोई नया नाम नहीं है।

    इतिहासकारों के मुताबिक वैशाली प्रारम्भ से ही व्यापार और गणतंत्र का केंद्र रहा है। खनन में सांप, हाथी और कुत्ते के चित्र बने मिट्टी के बर्तन मिले हैं। वैशाली में 1960 में भी खुदाई की गई थी जिसमें बुद्ध की मूर्ति के अवशेष मिले थे। इतिहास के छात्र भी इस खनन में मिल रहे प्रचीन अवशेषों को लेकर उत्साहित हैं।

    इतिहास के छात्र अविनाश कहते हैं कि प्राप्त अवशेष मौर्य शासन के पूर्व के हैं जो अद्भुत हैं। कई चमकदार वस्तुएं छात्रों को इतिहास की जानकारी देंगी तथा प्राचीन संसद को लोग देख सकेंगे।

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