काबुल : अफगानिस्तान की संसद के निचले सदन वोलेसी जिरगा में शनिवार को अमेरिका के साथ एक सामरिक समझौते को मंजूरी मिल गई। राष्ट्रपति हामिद करजई व उनके अमेरिकी समकक्ष बराक ओबामा ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों नेताओं ने एक मई को काबुल में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता अमेरिकी सेना को 2014 की समयसीमा के बाद भी अफगानिस्तान में टिकने की इजाजत देता है। साल 2014 तक नाटो सेना के करीब 130,000 सैनिक अफगानिस्तान से रवाना हो जाएंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक शनिवार के संसद सत्र में वोलेसी जिरगा के 249 सदस्यों में से 183 सदस्य ही मौजूद थे। इनमें से 168 सांसदों ने समझौते को मंजूरी दे दी। केवल छह सदस्यों ने समझौते के खिलाफ वोटिंग की। सांसद हबीबा दानिश ने कहा, "वोलेसी जिरगा के सदस्यों ने अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई व उनके अमेरिकी समकक्ष बराक ओबामा के बीच इस महीने की शुरुआत में हुए सामरिक भागीदारी समझौते को आज के सत्र में भारी बहुमत से मंजूरी दे दी।" अब इस समझौते को उच्च सदन या मुशरानो जिरगा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद अंत में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह एक कानूनी दस्तावेज बन जाएगा। अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों द्वारा इस समझौते को क्षेत्रीय अस्थिरता के रूप में देखे जाने की खबरों के बीच करजई ने शुक्रवार को आश्वासन दिया था कि अमेरिका संग भागीदारी से कोई खतरा नहीं है। करजई ने अफगानिस्तान यात्रा पर पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रेंकोइस होलैंड संग एक संयुक्त प्रेस सम्मेलन में कहा था, "अफगानिस्तान की जमीन से पड़ोसी देशों के लिए कोई खतरा नहीं है।"
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