
नई दिल्ली/मुम्बई : सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया के हड़ताल कर रहे पायलटों में दरार उभर आई है। कुछ पायलट बुधवार को काम पर लौट आए और विमानन कम्पनी के प्रबंधन ने कहा कि और पायलटों के काम पर लौट आने की उम्मीद है।
इस बीच विमानन कम्पनी ने विदेशी उड़ानों को बहाल करने के लिए बुधवार को अपनी आपात योजना लागू कर दी और अमेरिका के गंतव्य के लिए उड़ानों को आपस में मिला दिया गया।विमानन कम्पनी को बुधवार को सिर्फ एक उड़ान रद्द करनी पड़ी।
वहीं दूसरी ओर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एयर इंडिया के पायलटों के संघ इंडियन पायलट गिल्ड (आईपीजी) की याचिका पर फैसला गुरुवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया।इंडियन पायलट गिल्ड (आईपीजी) ने हालांकि हड़ताली पायलटों में दरार से इंकार किया और कहा कि उनकी हड़ताल जारी है।
विमानन कम्पनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "चिकित्सा अवकाश पर चल रहे तीन पायलट काम पर लौट चुके हैं। हम और अधिक पायलटों के काम पर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं। उसके बाद हम उनसे बात शुरू करेंगे।"केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक हड़ताल जारी रहेगी, कोई बातचीत नहीं होगी।
अधिकारी ने कहा, "जब तक वे काम पर लौट नहीं आते, कोई उनसे बात करने के लिए तैयार नहीं है। बर्खास्त पायलटों की फिर से बहाली जैसे सभी विकल्प खुले हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी निश्चित नहीं है। यदि सब कुछ सही रहा तो जल्दी ही हड़ताल समाप्त हो सकता है।
"आईपीजी के अध्यक्ष जितेंद्र अवध ने हालांकि मुम्बई से आईएएनएस से कहा, "हड़ताल जारी है। मुझे नहीं पता कि ये खबरें कहां से आ रही हैं।"आईपीजी के एक अन्य नेता ने कहा, "विमानन कम्पनी ने जिन तीन पायलटों के बारे में कहा है,
वे हमारे संघ के सदस्य नहीं हैं और परिवीक्षा पर हैं।"मंगलवार को लोकसभा में बहस का जवाब देते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा था, "मैं पायलटों से अनुरोध करता हूं कि काम पर लौट आएं।उसके बाद उनके सभी मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।
मैं सभी पक्षों से अनुरोध करता हूं कि वे पायलटों से काम पर आने के लिए कहें, ताकि यात्रियों को परेशानी नहीं हो और एयर इंडिया को बचाया जा सके।"सिंह ने कहा कि पायलटों ने चार मुख्य मांगें रखी हैं। उनमें शामिल हैं बोइंग 787 विमान उड़ाने का विशेषाधिकार,
2007 और उसके बाद के बकाए वेतन का भुगतान, काम पर नहीं होने के दौरान प्रथम श्रेणी में यात्रा का अधिकार और छह साल में कमांडर के रूप में प्रोन्नत किए जाने का अधिकार।विमानन कम्पनी ने विदेशी उड़ानों को बहाल करने के लिए बुधवार को अपनी आपात योजना लागू कर दी। इसके तहत यूरोप और अमेरिका के गंतव्य के लिए उड़ानों को आपस में मिला दिया गया।
कम्पनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "हमने आपात योजना लागू की है। हम यूरोप और अमेरिका के गंतव्यों को मिलाकर एक न्यूनतम संख्या में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का संचालन कर रहे हैं।"उन्होंने कहा, "दिल्ली-हांगकांग-सियोल मार्ग पर सिर्फ एक उड़ान रद्द की गई। हमने अंतर्राष्ट्रीय मार्गो पर एयर बस विमानों जैसे ए320, ए321 और ए330 को लगाया है।
"कम्पनी अपने 17 बोइंग 777 विमानों में से सिर्फ आठ का संचालन कर रही है। इन विमानों को इंडियन पायलट गिल्ड (आईपीजी) के हड़ताल कर रहे पायलट उड़ाते थे। कम्पनी की किफायती श्रेणी की अंतर्राष्ट्रीय सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस ने चार उड़ानें रद्द कीं।पायलटों की हड़ताल के कारण पिछले नौ दिनों में विमानन कम्पनी को 175 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है।अधिकारी ने कहा, "सप्ताह में कुल लगभग 175 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
हमें टिकटों के रद्द किए जाने, कर्मचारियों के बैठे रहने और बोइंग 777 विमानों के खड़े होने से दो-चार होना पड़ा।"उधर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईपीजी की याचिका पर फैसला गुरुवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया। पायलटों ने उच्च न्यायालय के एकल पीठ के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें पायलटों को अवैध हड़ताल पर जाने से रोका गया था।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और राजीव शकधर की दो सदस्यीय पीठ ने एयर इंडिया और आईपीजी की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।अपने नौ मई के फैसले में उच्च न्यायालय की न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल ने पायलटों की हड़ताल को अवैध करार दिया था।
दरअसल, बोइंग 787 ड्रीमलाइन विमान को उड़ाने का प्रशिक्षण पूर्व कम्पनी इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को दिए जाने के विरोध में आईपीजी से सम्बध करीब 100 पायलट सामूहिक रूप से चिकित्सा अवकाश पर चल रहे हैं।
बुधवार को आईपीजी ने कहा कि उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने बिना अधिकार और दूसरे पक्ष को सुने बिना आदेश पारित कर दिया।आईपीजी के वकील ने कहा, "जब आईपीजी का मुख्यालय मुम्बई में है ऐसे में दिल्ली उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार कहां है। आईपीजी का दिल्ली में केवल एक कार्यालय है और उस आधार एयर इंडिया अदालत नहीं जा सकती।