पुणे : एक स्कूली पाठ्य-पुस्तक में संविधान निर्माता बी.आर.अम्बेडकर पर बने एक कार्टून छापे जाने से उपजे विवाद को लेकर संसद में हंगामे के बाद शनिवार को पुणे स्थित एनसीईआरटी सलाहकार सुहास पालशीकर के कार्यालय में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की।
पालशीकर हालांकि एक दिन पूर्व ही पद से इस्तीफा दे चुके हैं। पुलिस ने तोड़फोड़ के सिलसिले में तीन लोगों को हिरासत में लिया।पुणे विश्वविद्यालय परिसर के एक भवन की पहली मंजिल पर स्थित पालशीकर के कार्यालय पर लगभग 10 लोग पहुंच गए और उनके तथा एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) के खिलाफ नारे लगाए।
उन्होंने कार्यालय में घुसकर फर्नीचर तोड़ दिए और नीले रंग के पाउडर छिड़क दिए।इस दौरान पालशीकर को हालांकि चोट नहीं लगी। इस हमले के सिलसिले में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में ले लिया।आरपीआई नेता परशुराम वाडेकर ने आईएएनएस को बताया, "कार्यकर्ताओं ने पालशीकर के कार्यालय पर हमला इसलिए किया, क्योंकि उन्होंने अम्बेडकर का अपमान कर गुनाह किया था।
"वहीं पालशीकर ने कहा कि उन्होंने तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।उन्होंने सवाल किया, "यह मामला पहली बार 2006 में सामने आया था। उस समय क्यों नहीं कुछ किया गया, अब क्यों इसे सनसनीखेज बनाया जा रहा है?
"ज्ञात हो कि व्यंग्य चित्रकार शंकर का बनाया यह विवादास्पद कार्टून पहली बार 1949 में उनकी साप्ताहिक पत्रिका में छपा था। 2006 में एनसीआरटी की कक्षा 11वीं की राजनीति विज्ञान की पाठ्य-पुस्तक में इसका समावेश किया गया। कार्टून में अम्बेडकर को एक घोंघे पर बैठे दिखाया गया है जिन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू संविधान निर्माण के कार्य में तेजी लाने का निर्देश दे रहे हैं।
पालशीकर ने कार्टून को तर्कसंगत बताते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। किताब में इसका समावेश इसलिए किया गया कि छात्र यह अच्छी तरह समझ सकें कि उस समय संविधान के निर्माण की कितनी बेसब्री से प्रतीक्षा की जा रही थी।पालशीकर पुणे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं।
कार्टून मुद्दे पर संसद में हंगामे के बाद शुक्रवार को उन्होंने एनसीआरटी के सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को संसद में कहा था कि इस विवाद के लिए हालांकि वह जिम्मेदार नहीं हैं, फिर भी राष्ट्र से क्षमा मांगने में उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं है।