
सुनाबेडा(ओडिशा) : ओडिशा का सुनाबेडा वन्यजीव अभयारण्य वैसे तो 30 बाघ और करीब इतने ही तेंदुए हैं। लेकिन नक्सलियों के भय से अब यहां पर्यटक एवं वन्यजीव प्रेमी आने से कतरा रहे हैं।
वन अधिकारियों ने बताया नक्सलियों द्वारा मंगलवार को नौपाड़ा जिले में पुलिस अधिकारी की हत्या किए जाने के बाद स्थितियां इतनी बुरी हो गई हैं कि अब वन विभाग के कर्मचारी भी अभयारण्य में जाने में हिचकिचा रहे हैं।
प्रभागीय वन अधिकारी (वन्यजीव) विश्व रंजन राउत ने आईएएनएस को बताया, "पिछले साल से अब तक अभयारण्य में कोई भी पर्यटक नहीं आया है।" जबकि यहां कभी प्रति वर्ष 15000 के आसपास पर्यटक आते थे।उन्होंने कहा, "अधिकारियों में भय है। नक्सलियों के हमले के भय से वे अभयारण्य में जाने के लिए अनिच्छुक हैं।
" सुनाबेडा में 2004 में हुई बाघों की गणना के अनुसार 32 बाघ और 36 तेंदुए हैं। इस अभयारण्य में लकड़बग्घा, भालू, भौंकने वाला हिरण, चीतल, गौर, पहाड़ी मैना और तीतर आदि पाए जाते हैं।राउत ने कहा कि अभयारण्य की देखभाल के लिए वन विभाग के 40 स्थाई एवं 30 अस्थाई कर्मचारी तैनात हैं।
उन्होंने कहा कि नक्सलियों के भय के कारण 2010 में बाघों की गणना नहीं कराई जा सकी।यहां तैनात एक वन अधिकारी ने बताया, "नक्सलियों की उपस्थिति के कारण पर्यटकों को तो छोड़ दीजिए स्थानीय लोग भी अभयारण्य में नहीं आ रहे हैं।"
लगभग 600 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले अभयारण्य में नक्सलियों की उपस्थिति का पता तब चला जब उन्होंने इलाके लगातार बैठकें करनी शुरू कर दी। इसके बाद नक्सलियों ने स्थानीय नेताओं, वन विभाग के अधिकारियों पर हमले किए और अभयारण्य में मौजूद सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
नक्सलियों ने पिछले साल एक बड़ी घटना को अंजाम देते हुए छत्तीसगढ़ के नौ पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था।पुलिस उपमहानिरीक्षक सौमेंद्र प्रियदर्शी ने आईएएनएस से कहा कि नक्सलियों द्वारा मंगलवार को पुलिसकर्मी की गई हत्या राज्य का पहला मामला है जिसमें पुलिस पर हमला किया गया।
अर्धसैनिक बलों के लिए पानी का टैंकर ले कर जा रहे सहायक पुलिस उप निरीक्षक कृपाराम माझी को 10 सशस्त्र नक्सलियों ने अगवा कर लिया था।सुनाबेडा अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने की योजना भी प्रस्तावित है।