
नई दिल्ली/मुम्बई : पायलटों के लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी सामूहिक रूप से चिकित्सा अवकाश पर रहने के कारण विमानन कम्पनी एयर इंडिया को गुरुवार को 8 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ी और अगले पांच दिनों के लिए लम्बी दूरी के उड़ानों की बुकिंग रोकनी पड़ी। विमानन कम्पनी ने नौ और पायलटों को गुरुवार को बर्खास्त कर दिया।
एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से नई दिल्ली में कहा, "हमें दिल्ली और मुम्बई से आठ अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। शेष उड़ानों का संचालन पूर्व योजना के मुताबिक जारी है।"नई दिल्ली से शिकागो, टोरंटो, शंघाई और फ्रैंकफर्ट जैसे अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों के बीच जाने या आने वाली उड़ानें प्रभावित हुईं।
मुम्बई से न्यू जर्सी और रियाद की दो उड़ानें रद्द हुईं।कम्पनी की किफायती श्रेणी की इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस को भी दक्षिण भारत से मध्य पूर्व की छह उड़ानें रद्द करनी पड़ी।कम्पनी ने 15 मई तक अत्यधिक लम्बी दूरी की उड़ानों के लिए टिकटों की बुकिंग बंद कर दी। इससे अमेरिका, यूरोप तथा शंघाई, हांगकांग और सिंगापुर जाने वाली करीब 15 उड़ानें प्रभावित होंगी।
कम्पनी ने मंगलवार से सामूहिक छुट्टी पर जाने वाले नौ और पायलटों को बर्खास्त कर दिया।विमानन कम्पनी के अधिकारी ने कहा, "हमने नौ और पायलटों को बर्खास्त कर दिया है। हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन हम इस तरह की अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"कम्पनी ने बुधवार को 26 पायलटों और मंगलवार को 10 पायलटों को बर्खास्त कर दिया था।
कम्पनी ने इंडियन पायलट गिल्ड (आईपीजी) की भी मान्यता समाप्त कर दी थी।सोमवार मध्य रात्रि से जारी पायलटों की इस हड़ताल के विरुद्ध एयर इंडिया ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली थी। न्यायालय ने हड़ताल पर रोक लगा दी थी। मंगलवार को नागर उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने पायलटों की हड़ताल को अवैध करार दिया था।
हड़ताल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एयर इंडिया ने पायलटों के संघ इंडियन पायलट्स गिल्ड (आईपीजी) की मान्यता रद्द कर दी थी। अब पायलटों के संघ ने कहा है कि वह वार्ता के लिए तैयार है लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक पायलट काम पर नहीं लौटते हैं तब तक कोई वार्ता नहीं हो सकती है।गतिरोध जारी रहने के कारण एयरलाइन ने रिजर्व एवं वरिष्ठ पायलटों को काम पर लगाया है।आईपीजी पूर्व के इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को बोइंग 787 ड्रीमलाइनर पर प्रशिक्षण देने का विरोध कर रही हैं।
आईपीजी ने एयर इंडिया प्रबंधन पर उनकी मांगों से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को नागर उड्डयन मंत्री अजित सिंह से वार्ता प्रक्रिया शुरू करने की अपील की। माना जा रहा है कि मान्यता रद्द होने के बाद आईपीजी ने दबावों के तहत यह फैसला लिया है।आईपीजी ने बुधवार देर रात दिए बयान में सिंह से वार्ता प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह करते हुए कहा, "मंत्रालय ने अभी तक वार्ता के प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया है।
आईपीजी इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रबंधन/मंत्रालय के अधिकारियों से कहीं भी और किसी भी समय मिलने के लिए तैयार है।"आईपीजी ने एयर इंडिया पर मनमानेपन एवं एयर इंडिया एवं पूर्व की इंडियन एयरलाइंस के पायलटों के मध्य भेदभाव करने का आरोप लगाया। संघ ने कहा कि प्रबंधन ने इंडियन एयरलाइंस के पायलटों को 2000 डॉलर प्रति माह की वेतन वृद्धि देने के अलावा और न्यायमूर्ति धर्माधिकारी समिति की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना उन्हें बोइंस 787 ड्रीमलाइनर विमान पर प्रशिक्षण देने का फैसला कर लिया।
आईपीजी ने कहा, "जैसा कि हम जानते हैं कि एयर इंडिया न केवल घाटे में है बल्कि समय पर वेतन देने में भी असमर्थ है। उसके बाद भी प्रबंधन ने वेतन वृद्धि किया।" संघ ने प्रबंधन पर इंडियन एयरलाइंस के सहायक पायलटों की तुलना में एयर इंडिया के सहायक पायलटों को देरी से प्रोन्नति देने का आरोप लगाया।