
नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने शनिवार को अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना, राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद निरोधक केंद्र देश की सुरक्षा अधोसंरचना का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ होगा।
कुछ मुख्यमंत्रियों की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश के तहत चिदम्बरम ने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला केंद्र और राज्य सरकारों की साझी जिम्मेदारी है। चिदम्बरम ने विवादास्पद एनसीटीसी पर यहां मुख्यमंत्रियों के समक्ष अपने सम्बोधन में कहा, "मैं आप सभी को और देश की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आतंकवाद से मुकाबला एक साझी जिम्मेदारी है।
संविधान जो कहता है, आगे का व्यावहारिक और विवेकशील रास्ता वही है।"ज्ञात हो कि गैर कांग्रेस शासित राज्यों के व्यापक विरोध के कारण एनसीटीसी का गठन लम्बे समय से लटका हुआ है।चिदम्बरम ने कहा कि सरकार राज्यों के साथ मिलकर पिछले एक वर्ष में 21 आतंकवादी गिरोहों का पर्दाफाश कर चुकी है। लेकिन जिहादी आतंकवाद और नक्सलवाद के मामले अभी भी है।
सुरक्षा एजेंसियां या तो क्षमता के अभाव के कारण या समय पर निर्णय के अभाव के कारण कार्रवाई नहीं कर पाईं हैं।चिदम्बरम ने सवाल किया, "ऐसे मामलों में केंद्र सरकार को आखिर क्या करना चाहिए?" उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एनसीटीसी देश की नई सुरक्षा अधोसंरचना का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ होगा, जिससे राज्यों तथा केंद्र सरकार की आतंकवाद से मुकाबले की क्षमता में वृद्धि होगी।चिदम्बरम ने कहा कि आतंकवाद निरोधी यह एजेंसी अमेरिकी एनसीटीसी पर आधारित है, जिसके पास आतंकवाद निरोधक अभियान चलाने का अधिकार है।
इस अभियान में राष्ट्रीय शक्ति के सभी तत्व शामिल होते हैं।चिदम्बरम ने कहा, "वहां एफबीआई और सीक्रेट सर्विस के अधिकार क्षेत्र में भी पूरा देश आता है। जर्मनी में संयुक्त आतंकवाद निरोधक केंद्र (जीटीएजे) और संयुक्त इंटरनेट चौकसी केंद्र (जीआईजेड) है।"गृह मंत्री ने कहा, "जब राज्य सरकारें पर्याप्त क्षमता विकसित कर लेगी और अंतर राज्यीय सहयोग अधिक प्रभावी हो जाएगा, तो मैं समझता हूं कि केंद्र सरकार पीछे हट सकती है या हट जाएगी।" उन्होंने कहा कि तब तक "हमें मिलकर काम करना है। मुझे भरोसा है कि हम देश को अधिक सुरक्षित बना सकते हैं।"