
भोपाल : दूसरे सरिस्का के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश के पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के हालात बदलने लगे हैं। यहां बाघों की संख्या बढ़ाने के प्रयोग सफल हो रहे हैं और अब यहां बाघों की संख्या 17 हो गई है।
ज्ञात हो कि पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के बाघ विहीन हो जाने के बाद तीन वर्ष पूर्व कान्हा व बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से बाघिन व बाघ को लाकर बाघ वंश वृद्वि का प्रयोग किया था। यह प्रयोग अब सफल होता मालूम पड़ता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में गुरुवार को वन विभाग की समीक्षा बैठक में बताया गया कि पन्ना वन क्षेत्र में एक नर तथा तीन मादा बाघ छोड़कर किया गया प्रयोग सफल रहा है।
इस समय इस वन क्षेत्र में शावकों को मिला कर बाघों की संख्या 17 हो गई है।बैठक में बताया गया कि शिवपुर के जंगलों में साउथ अफ्रीका अथवा नामीबिया से 13 चीते लाने की योजना है।
चीता प्रतिस्थापना की इस योजना के लिये केंद्र सरकार द्वारा बीते वित्तीय वर्ष तीन करोड़ छह लाख रूपये मंजूर किए गए थे, इस राशि का उपयोग नहीं हो सका। इस राशि को दोबारा स्वीकृत कराने के लिये केन्द्र को पत्र भेजा जा रहा है।
बैठक में बताया गया कि उत्कृष्ट वन प्रबंधन के लिये कान्हा, नवाचार के लिये पन्ना तथा ग्रामों के पुनर्वास की श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के लिये सतपुड़ा संरक्षित वन क्षेत्र का राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।है।